शनिवार, सितंबर 19 2026 | 08:35:55 PM

भारतीय तटरक्षक बल के लिए गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित पांचवां एफपीवी ‘अचल’ किया गया लॉन्च

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा निर्मित किये जा रहे आठ जहाजों की श्रृंखला में बना पांचवां फास्ट पैट्रोल वेसल (एफपीवी) ‘अचल’ का 16 जून, 2025 को गोवा में श्रीमती कविता हरबोला द्वारा तटरक्षक कमांडर (पश्चिमी सीबोर्ड), अपर महानिदेशक अनिल कुमार हरबोला की उपस्थिति में औपचारिक रूप से जलावतरण किया गया।

अमेरिकी शिपिंग ब्यूरो और भारतीय शिपिंग रजिस्टर के कड़े दोहरे-श्रेणी प्रमाणन के तहत डिज़ाइन और निर्मित एफपीवी में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। पोत की लंबाई 52 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर है और इसका विस्थापन 320 टन है। सीपीपी-आधारित प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित यह पोत 27 समुद्री मील की अधिकतम गति तक पहुंच सकता है।

सुरक्षा, निगरानी, ​​नियंत्रण और पर्यवेक्षण की अपनी प्राथमिक भूमिकाओं के साथ पोत ‘अचल’ अपतटीय संपत्तियों और द्वीप क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सुसज्जित है। इसका जलावतरण भारतीय तटरक्षक बल और जीएसएल के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी में एक और महत्वपूर्ण  उपलब्धि को दर्शाता है, जो रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में सामूहिक प्रयास को और मजबूत करता है।

कुल 473 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना ने पर्याप्त रोजगार सृजन करके और विभिन्न कारखानों तथा जीएसएल में उत्पादन गतिविधियों में लगे एमएसएमई को समर्थन देकर स्थानीय उद्योग को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया है।

- Advertisement -

समारोह में जीएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय के साथ-साथ भारतीय नौसेना, आईसीजी और शिपयार्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।