रविवार, सितंबर 20 2026 | 01:41:55 PM

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के रचनाकार और प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वनजी सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली. पत्थरों में जान फूंकने वाला जादूगर के रूप में मशहूर भारतीय मूर्तिकार राम वनजी सुतार का निधन हो गया है. इसके साथ ही कला जगत में एक युग का अंत हो गया है. राम वनजी ने 100 साल की उम्र में 17 दिसंबर 2025 की मध्य रात्रि को नोएडा स्थित अपने निवास पर आखिरी सांस ली. ​राम सुतार ने केवल भारत, बल्कि अमेरिका, फ्रांस और इटली सहित दुनिया के कई देशों में महात्मा गांधी की प्रतिमाएं स्थापित करके भारत का नाम रोशन किया.

प्रधानमंत्री मोदी ने निधन पर जताया शोक

प्रधानमंत्री मोदी ने राम सुतार के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा कि राम सुतार जी के निधन से दुख हुआ है. वे एक असाधारण मूर्तिकार थे, जिनकी कलात्मकता ने भारत को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित कई प्रतिष्ठित स्मारक प्रदान किए. उनकी कृतियों को भारत के इतिहास, संस्कृति और सामूहिक भावना की सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में हमेशा सराहा जाएगा. उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय गौरव को अमर कर दिया है. उनकी कृतियां कलाकारों और लोगों को प्रेरित करती रहेंगी. उनके परिवार, प्रशंसकों और उनके कार्यों से प्रभावित लोगों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं. ओम शांति…

राम सुतार का 70 साल लंबा करियर रहा

राम सुतार 100 साल की उम्र में भी एक्टिव थे और कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंडूर गांव में हुआ था. उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से शिक्षा ली और अपने 70 साल लंबे करियर में भारतीय मूर्तिकला को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई है, जो गुजरात में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा है, जिसे दुनिया स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहती है. ​

गांधीजी और शिवाजी की प्रतिमा भी बनाई

दिल्ली में संसद के बाहर ध्यानमग्न मुद्रा में बैठी गांधीजी की कांस्य की प्रतिमा उन्होंने बनाई थी. मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध पर लगी 45 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा उन्होंने बनाई थी. उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर, छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सुहेलदेव समेत कई महापुरुषों की प्रतिमाएं बनाई हैं. मूर्तिकला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए ​भारत सरकार और कई राज्य की सरकारों ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा. उनके योगदान और रचनाओं को सम्मानित किया.

- Advertisement -

राम सुतार को इन पुरस्कारों से नवाजा गया

भारत सरकार ने साल 1999 में रामजी सुतार को पद्मश्री और 2016 में ​पद्म भूषण देकर सम्मानित किया था. साल 2016 में ही उन्हें ​टैगोर सांस्कृतिक सद्भाव पुरस्कार मिली था. हाल ही में नवंबर 2025 में उन्हें महाराष्ट्र के सर्वोच्च पुरस्कार ‘महाराष्ट्र भूषण’ से सम्मानित किया गया था, जो उनके घर आकर दिया गया था. बताया जा रहा है कि राम सुतार पिछले कई दिन से बीमार चल रहे थे और उनका घर पर ही इलाज किया जा रहा था, लेकिन बीती रात उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.

साभार : न्यूज24

‘गांधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ पुस्तक के बारे में जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें :

https://matribhumisamachar.com/2025/12/10/86283/

आप इस ई-बुक को पढ़ने के लिए निम्न लिंक पर भी क्लिक कर सकते हैं:

- Advertisement -

https://www.amazon.in/dp/B0FTMKHGV6

यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।