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भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर तीसरे दौर की वार्ता क्वीन्सटाउन में संपन्न

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर तीसरे दौर की वार्ता 19 सितंबर, 2025 को क्वीन्सटाउन, न्यूज़ीलैंड में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस दौरान चर्चा से आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने और संतुलित एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर शीघ्र निष्कर्ष निकालने की दिशा में काम करने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री माननीय क्रिस्टोफर लक्सन के दृष्टिकोण से प्रेरित, वार्ताओं में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को गहरा करने का साझा संकल्प परिलक्षित हुआ। एफटीए औपचारिक रूप से 16 मार्च, 2025 को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री श्री टॉड मैक्ले की बैठक के दौरान शुरू किया गया।

15 से 19 सितंबर, 2025 तक आयोजित तीसरे दौर में समझौते के सभी क्षेत्रों पर रचनात्मक चर्चा हुई। कई अध्याय पूरे हुए और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई।

वित्त वर्ष 2024-25 में न्यूजीलैंड के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। प्रस्तावित एफटीए से व्यापार प्रवाह को और बढ़ावा मिलने, निवेश संबंधों को बढ़ावा मिलने, आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करने और दोनों देशों में व्यवसायों के लिए विश्वसनीय ढांचा तैयार होने की उम्मीद है।

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दोनों पक्षों ने अंतर-सत्रीय वार्ताओं के माध्यम से गति बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। आमने-सामने की वार्ता का अगला दौर 13-14 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।