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हाईकोर्ट ने संभल जामा मस्जिद पर मुस्लिम पक्ष की रिवीजन पिटीशन को किया खारिज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश स्थित संभल में जामा मस्जिद सर्वे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका लगा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सिविल रिवीजन पिटीशन खारिज कर दी है. हाईकोर्ट के इस फैसले से अब यह साफ हो गया है कि संभल की जिला अदालत में सर्वे का मुकदमा आगे चलेगा. जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मुस्लिम पक्ष की दलीलें नामंजूर करते हुए फैसला सुनाया.

हाईकोर्ट में 19 नवंबर 2024 के सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती

13 मई को मस्जिद कमेटी की सिविल रिवीजन पिटीशन पर बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था. संभल की जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद पर मस्जिद कमेटी द्वारा सिविल रिवीजन याचिका दाखिल की गई थी. मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमे की पोषणीयता को चुनौती दी थी. मस्जिद कमेटी ने 19 नवंबर 2024 के सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी.

नवंबर में हुआ था सर्वे

गौरतलब है कि संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम श्री हरिहर मंदिर मामले में 24 नवंबर को महंत ऋषिराज की याचिका पर अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने कोर्ट में अपील की थी. सिविल कोर्ट के बाद मस्जिद बनाम मंदिर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया. बता दें बीते साल नवंबर में मस्जिद का सर्वे हुआ था जिसका मस्जिद कमेटी ने विरोध किया. यह सर्वे स्थानीय अदालत के आदेश पर हुआ था. सर्वे के बाद इसकी रिपोर्ट्स स्थानीय अदालत में कोर्ट कमिश्नर की अगुवाई में जमा कर दी गईं थीं. पहला सर्वे जहां अदालत के आदेश के तुरंत बाद 19 नवंबर को हुआ तो वहीं एक अन्य सर्वे 24 नवंबर हुआ और उसी दौरान हिंसा भड़क गई जिसमें चार लोग मारे गए थे. हिंसा के मामलों में अब तक 70 से ज्यादा लोग गिरफ्तार कर अदालत द्वारा जेल भेजे जा चुके हैं.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।