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किसान लघु माध्यमिक विद्यालय पर लगा बंजर भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर संचालित करने का आरोप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. बस्ती के महूघाट-विशेषरगंज रोड स्थित पूरे अजबी गांव (नारायणपुर ग्रामसभा) की बंजर भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर संचालित करने का आरोप लगा है। अधिवक्ता प्रभात शुक्ल के अनुसार गाटा संख्या 48, 49, 50, 51, 52 व 53 पर कब्ज़ा कर किसान लघु माध्यमिक विद्यालय हरदिया पूरे अजबी में संचालित किया जा रहा है। यह विद्यालय हरदिया गांव सभा से संबद्ध बताया गया है, जबकि कब्ज़ा की गई ज़मीन पूरे अजबी गांव की है।
प्रभात शुक्ल के कहने पर अजबी निवासी विजय प्रकाश शुक्ल ने मामले की शिकायत की थी। अधिवक्ता के अनुसार इस आधार पर उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में जनहित याचिका (संख्या 2036/2025) दाखिल की गई। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार हर्रैया से रिपोर्ट तलब की। स्थानीय लेखपाल विक्की यादव द्वारा की गई जांच में पाया गया कि गाटा संख्या 51, 52 व 53 पर विद्यालय की इमारत बनी है जबकि अन्य गाटों पर खेल का मैदान खाली पड़ा है। इस आधार पर तहसीलदार हर्रैया अभयराज ने 18 अगस्त को ही विद्यालय प्रबंधक राकेश मणि त्रिपाठी के विरुद्ध बेदखली का मुकदमा दर्ज कर न्यायालय को रिपोर्ट सौंप दी।
अधिवक्ता के अनुसार इसके बावजूद, एक माह बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही नहीं हो पाई है। गांव के प्रतिष्ठित लोग—विजय प्रकाश शुक्ल, चंद्रशेखर मिश्र, अनिल मिश्र, गजराज शुक्ल और सुनील यादव ने प्रशासन पर लापरवाही, निष्क्रियता और मनमाने रवैये का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि देश की बंजर भूमि को शीघ्र अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, लेकिन तहसील प्रशासन आदेशों की अनदेखी कर रहा है। इससे न केवल जनहित प्रभावित हो रहा है, बल्कि सरकार को भी नुकसान हो रहा है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार किसान लघु माध्यमिक विद्यालय हरदिया के नाम पर दर्ज मूल भूमि हरदिया गांव में ही है, लेकिन वहां की जमीन को प्रबंधक राकेश मणि त्रिपाठी निजी कृषिकार्य में उपयोग कर रहे हैं, जबकि विद्यालय पूरे अजबी गांव की बंजर भूमि पर संचालित हो रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।