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सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा को कहा गद्दार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। सदन में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान विवादित बयान दे डाला। उन्होंने बाबर (Babar) और औरंगजेब के मुद्दे पर बात रखते हुए राणा सांगा (Rana Sanga) को गद्दार करार दिया। यह वीडियो क्लिप शेयर करते हुए भाजपा के पूर्व सांसद संजीव बालियान ने राजपूत और समस्त हिंदू समाज का अपमान करार दिया है। उन्होंने माफी की मांग की है। भाजपा नेता और मुजफ्फरगर से पूर्व सांसद संजीव बालियान ने सपा सांसद की क्लिप को शेयर करते हुए X पर लिखा,’धिक्कार है- तुष्टिकरण की सभी हदें पार करके सपा नेता “रामजी लाल सुमन” द्वारा संसद में “महान वीर राणा सांगा” को गद्दार कहना हमारे राजपूत समाज और समस्त हिंदू समाज का घोर अपमान है। सपा को ऐसे शर्मनाक कृत्य पर पूरे देश से माफ़ी माँगनी चाहिए।’

राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश को संबोधित करते हुए सांसद सुमन ने कहा- भाजपा के लोगों का तकियाकलाम हो गया है कि सबको कहते हैं- इनमें बाबर का डीएनए है। अब हिंदुस्तान का मुसलमान तो बाबर को आदर्श मानता नहीं है, वो तो मोहम्मद साहब को अपना आदर्श मानता है। सूफी-संतों की परंपरा को आदर्श मानता है। मैं तो यह जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन? बाबर को तो इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा लेकर आया था। उन्होंने आगे कहा- तो मुसलमान तो बाबर की औलाद हैं। लेकिन तुम तो गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। ये अब हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए। बाबर की आलोचना तो करते हैं लेकिन राणा सांगा की आलोचना क्यों नहीं करते हैं? इस बात पर सदन में हंगामा मच गया और सभापति ने संसदीय मर्यादाओं का ध्यान रखने की हिदायत देकर उन्हें बैठ जाने को कहा।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।