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सुप्रीम कोर्ट के जजों का प्रतिनिधिमंडल न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के नेतृत्व में मणिपुर पहुंचा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इंफाल. मणिपुर में पिछले करीब दो साल से जारी जातीय हिंसा के बीच शनिवार सुबह सुप्रीम कोर्ट की एक टीम स्‍टेट में पहुंची. जजों के डेलीगेशन ने सुबह हवाई अड्डे पर पहुंचा और उनका आज मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों से मिलने का कार्यक्रम है. न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के नेतृत्व में शीर्ष अदालत के प्रतिनिधिमंडल का हवाई अड्डे पर पहुंचने पर राज्य के वकीलों ने गर्मजोशी से स्वागत किया. अधिकारियों ने बताया कि न्यायाधीश राहत शिविरों का दौरा करेंगे और चुराचांदपुर जिले में लघु सचिवालय से कानूनी सेवा शिविरों, कानूनी सहायता केन्द्रों और अस्थायी चिकित्सा केन्द्रों का वर्चुल माध्यम से उद्घाटन करेंगे. इसके बाद वे बिष्णुपुर में मोइरांग कॉलेज में एक राहत शिविर जाएंगे.

इस संबंध में एक न्यायाधीश ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘हम अभी यहां आए हैं और आगे के कार्यक्रम को लेकर आशान्वित हैं.’’ अधिकारियों ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह मेइती समुदाय से हैं और वह कुकी बहुल चुराचांदपुर जिले का दौरा नहीं करेंगे क्योंकि वहां वकीलों के एक संगठन ने इस पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति सिंह बिष्णुपुर जिले का दौरा करेंगे. ‘ऑल मणिपुर बार एसोसिएशन’ (एएमबीए) ने चुराचांदपुर जिले की बार एसोसिएशन से आग्रह किया है कि वह मेइती समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को कुकी-जो बहुल क्षेत्र का दौरा करने से रोकने वाले अपने निर्देश को वापस लें.

2023 से जारी है हिंसा

एएमबीए के अध्यक्ष पुयम तोमचा मीतेई ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का यह दौरा ऐतिहासिक और अपनी तरह का पहला दौरा है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रविवार को मणिपुर हाईकोर्ट में एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे. मणिपुर में मई 2023 से अब तक मेइती और कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।