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बलूच विद्रोहियों ने चीनी कंपनियों को बलूचिस्तान में खनन करने से रोका

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इस्लामाबाद. बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है. जितना बड़ा प्रांत है उतनी ही बड़ी मुसीबतों को झेल रहा है. बलूची नागरिक 1948 से ही पाकिस्तान शासन के खिलाफ है. आजादी के लिये अब भी लड़ रहा है. बलूचिस्तान के लोगों CPEC और उसकी आड़ में जो खनिज संसाधनों का दोहन हो रहा है, उसका लगातार विरोध कर रही है. उसी आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना और पुलिस की बर्बरता जारी है. अब बलूच विद्रोहियों ने ही सोना और तांबा के भंडार वाले सैंदक (saindak) माइन पर काम कर रहे चीन के प्रोजेक्ट पर जबरदस्त हमला बोल दिया है. बलूचिस्तान की मीडिया के मुताबिक संदैक को जाने वाली सप्लाई के काफिले पर हमला किया गया. मैटलर्जिकल कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना इस खदान में खनन का काम जारी है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सुरक्षा के बीच 29 गाडियों का काफिला गुजर रहा था. कलात के मंगुचर से होकर गुजरने वाली क्वेटा कराची हाइवे पर अटैक किया गया.

30 साल से चीनी कंपनी कर रही है दोहन

.बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा खनिज पदार्थों भंडार है. चीन की कंपनियों ने खनन कर कर के वहां की सारी पूंजी लूट रहा है.एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2002 से यह चीनी कंपनियां बलूचिस्तान में खनिज की माईनिंग कर रही है. साल 2017 में पांच साल के लिए इस लीज को बढ़ाया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक हर साल तकरीबन 25 टन सोना और 12000 से 15000 टन तांबा का खनन करती है. यह चीनी कंपनियां इस मुनाफे का आधा हिस्सा यानी की 50 फीसदी खुद रखती है.  48 फीसदी पाकिस्तान को देती है और महज 2 फीसदी बलूचिस्तान को मिलता है.

हथियारों के बदले दी माइन

चीन सरकार के आधीन की मेटलर्जीकल कॉर्पोरेशन ऑफ चायना को पाकिस्तान ने सोना, चांदी और तांबे के भंड़ार वाली दो माइन दी थी. रिपोर्ट के मुताबिक 1990 के दशक में M-9 और M-11 मिसाइल सिस्टम देने के एवज में बलूचिस्तान के चगई प्रांत की सैंदक (saindak) और रेको दिक ( Reko Diq ) खान खनन के लिए दी गई.  खनन की लीज बीस साल की थी जिसे आगे बढ़ा दिया गया था. चीन ने कम समय में इन खदानों से ताबड़तोड़ दोहन किया जो अब बी जारी है.  अगर इन दोनों माइन में सोने और तांबे की मात्र की बात करें तो सैंदक माइन में रेको दिक माइन के मुकाबले 20 गुना ज्यादा है. इसकी तादाद तकरीबन 6 लाख किलो के करीब है.

जिसने आवाज उठाई कर दिया गया गायब

अगर बलूचिस्तान के मानवाधिकार काउंसिल के दावों की बात करें तो अब तक 22600 से ज्यादा बलूच नागरिक लापता है. फेक एंकाउंटर , टार्गेट किलिंग , यातनाएँ , एक्स्ट्रा जुडीशियल कलिंग और महिलाओं की हत्या संबंधी मामलों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई. अब चीन की शह पर तेज हुई यातनाओं का बदला वहां के विद्रोही गुट ले रहे है.

साभार : न्यूज18

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