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नेता प्रतिपक्ष व सपा विधायक माता प्रसाद पांडे ने कंस से की योगी आदित्यनाथ की तुलना

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के नेता माता प्रसाद पांडे ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लेकर विवादित बयान दिया है, जिसके बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. नेता प्रतिपक्ष ने सीएम योगी की कंस से तुलना करते हुए कहा कि वो अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी से उसी तरह डरे रहते हैं जैसे कंस भगवान श्री कृष्ण से हमेशा डरा रहता था.

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे से जब एबीपी न्यूज ने सीएम योगी गिद्ध वाले बयान पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि सीएम योगी और भारतीय जनता पार्टी की कंस से तुलना कर दी. उन्होंने  भगवान श्री कृष्ण और कंस का जिक्र करते हुए कहा कि “हमारी भारतीय संस्कृति में एक कंस राजा हुआ था. वो क्रूर भी था और उसने अपने रिश्तेदारों और बहन भाई को जेल में डाला था, क्योंकि उसे किसी ने बता दिया था कि उसकी बहन का जो आठवीं संतान कृष्ण होंगे वो उसके नाश का कारण बनेंगे इसलिए वो हमेशा डरा रहता है.”

सीएम योगी को लेकर दिया विवादित बयान

सपा नेता ने आगे कहा कि “उसी तरह की स्थिति यहां भी आ गई कि हमेशा अखिलेश जी और समाजवादी पार्टी से कुछ लोग डरे रहते हैं. उन्होंने कहा कि हम कह रहे हैं कुछ लोग अखिलेश जी और समाजवादी पार्टी से उसी तरह डरे रहते हैं जैसे कंस डरा रहता था. हम मुख्यमंत्री को कंस तो नहीं कह रहे हैं हमने सिर्फ भाव बताया है.

दरअसल यूपी विधानसभा में सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम योगी ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा था. उन्होंने महाकुंभ की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वालों को भी जवाब दिया और कहा कि “महाकुंभ में जिसने जो तलाशा उसको वही मिला, गिद्धों को केवल लाश मिली, सुअरों को गंदगी मिली, संवेदनशील लोगों को रिश्तों की खूबसूरत तस्वीर मिली. आस्थावानों को पुण्य मिला, सज्जनो को सज्जनता मिली, अमीरों को धंधा मिला, गरीबों को रोजगार मिला, भक्तों को भगवन मिला,  सनातन की सुंदरता, आखिर समाजवादी और वामपंथियों को कैसे नजर आएगी.”

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सीएम योगी के इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी. सपा अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि ‘महाकुंभ में कई बार जाकर भी जिनका वैचारिक उद्धार नहीं हुआ, उनके पाप और पतन की सीमा भला कौन नाप सकता है’

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।