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नोटिस देने पहुंची पुलिस को नहीं मिले संभल सांसद, दिल्ली में हैं बर्क

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी सांसद जिया उर रहमान बर्क के घर मंगलवार को दुसरे दिन पुलिस पूछताछ का नोटिस देने पहुंची. पुलिस सांसद से संभल में 24 नवंबर को जमा मस्जिद हिंसा में पूछताछ के लिए नोटिस देने पहुंची थी. हालांकि, घर पर सांसद नहीं मिले. वह परिवार समेत दिल्ली में हैं. सांसद के परिजन ने पता चला उनकी मां की हालत खराब है और वह दिल्ली में भर्ती हैं. वहीं, सांसद के नहीं मिलने से पुलिस ने नोटिस की तामील नहीं कर पाई. संभल के थाना नाखासा एसआईटी टीम पुलिस के साथ जिया उर रहमान बर्क के निवास पर पहुंची थी. इससे एक दिन पहले सांसद के घर पर प्रशासन की टीम पहुंची और उनके नवनिर्मित कुछ भवन के हिस्से का मुआयना किया. साथ ही एक नोटिस में घर के क्षेत्रफल के बारे में पूछा गया और इसे बिना नक्शा के बताया गया.

एमपी नामजद अभियुक्त, बयान जरूरी- एसपी

एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि संभल में पिछले साल नवंबर में हुई हिंसा मामले में पुलिस सांसद जिया उर रहमान वर्क को पूछताछ के लिए नोटिस जारी करेगी. संभल जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि हाईकोर्ट के दिशानिर्देश के अनुसार सांसद को नोटिस दी जाएगी और उनसे पूछताछ में शामिल होने का अनुरोध किया जाएगा. एसपी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह नामजद अभियुक्त हैं और इसके आधार पर उनका बयान होना भी जरूरी है. एसपी ने कहा कि उनकी अन्य व्यक्तियों से क्या बात हुई, यह सब पूछताछ में जरूरी है. पिछले साल स्थानीय अदालत के आदेश पर संभल की जामा मस्जिद में एक सर्वेक्षण के दौरान हुए विरोध के कारण हिंसा भड़क गई जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी.

कानून का हथौड़ा सब पर बराबर चले- सांसद

वहीं, अपने घर के नक़्शे की जांच पर सांसद ने कहा, ‘मेरे खिलाफ जो कार्रवाई हो रही है वो प्रदेश और देश देख रहा है. मेरी गलती है कि मैंने अपने लोगों के हक की आवाज बुलंद किया. अगर ये गलती है तो मैं ये गलती करता रहूंगा. पुलिस प्रशासन मेरी आवाज को दबाना चाहता है पर वो गलत है. मैं घुटने टेकने वाला नहीं हूं, हमें न्यायपालिका पर भरोसा है. सभी अधिकारियों और उनके घर के नक्शे की जांच हो. कानून का हथौड़ा सब पर बराबर चले.’

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।