रविवार, सितंबर 20 2026 | 10:25:55 AM

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकाल लगाए जाने के 50 वर्ष पूरा होने के मौके पर लोकतंत्र को संरक्षित रखने का संकल्प लिया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में आपातकाल लगाये जाने के 50 वर्ष पूरा होने के मौके पर उन अनगिनत व्यक्तियों की दमन युक्त पीड़ा को याद रखने और उनके त्याग को सम्मान देने का संकल्प लिया, जिन्होंने आपातकाल और भारतीय संविधान की भावना को कमतर किये जाने के प्रयास का विरोध किया था। 1974 में नवनिर्माण आंदोलन और सम्पूर्ण क्रांति अभियान को कुचलने के प्रयास के साथ तत्कालीन सरकार ने आपातकाल की ओर क्रूर कदम बढ़ाये थे।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज दो मिनट का मौन रखकर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनके संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए थे और उन्हें अकल्पनीय भयावहता का सामना करना पड़ा था। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकाल की ज्यादतियों के खिलाफ उनकी अनुकरणीय हिम्मत और साहस पूर्ण प्रतिरोध के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की।

संविधान को शक्तिहीन करने के प्रयास, भारतीय गणतंत्र और लोकतांत्रिक भावना पर हमले, संघवाद को कमजोर करने और मौलिक अधिकारों, मानव स्वतंत्रता और गरिमा को निलंबित किये जाने के भारतीय इतिहास के अविस्मरणीय दुखद अध्याय वाले संविधान हत्या दिवस के आज 2025 में 50 वर्ष पूरे हुए हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस बात की पुनः पुष्टि की कि भारत के लोगों का भारतीय संविधान और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों में दृढ़ विश्वास है। युवाओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे उन लोगों से प्रेरणा लें जिन्होंने तानाशाही प्रवृत्तियों का प्रबल विरोध किया और हमारे संविधान और इसके लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़े रहे।

- Advertisement -

भारत लोकतंत्र की जननी के रूप में संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और उन्हें संरक्षित और बचाये रखने का अप्रतिम उदाहरण है।

आइए, एक राष्ट्र के रूप में, हम अपने संविधान और इसकी लोकतांत्रिक एवं संघीय भावना कायम रखने के अपने संकल्प को फिर से दोहराएं।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।