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भारत की चिकित्सा शिक्षा में प्रगति: 819 कॉलेज, 1.29 लाख पूर्वस्नातक सीटें: जे.पी. नड्डा

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने आज यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के 50वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

श्री नड्डा ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों को बधाई दी और भारत में चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में एम्स के अद्वितीय योगदान की सराहना की। उन्होंने युवा डॉक्टरों से सहानुभूति के साथ सेवा करने, नैतिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और देश की उभरती स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नवाचार का उपयोग करने का आह्वान किया।

श्री नड्डा ने कहा “चिकित्सा विज्ञान, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, राजधानी दिल्‍ली स्थित एम्स ने न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर अपना स्थान बनाया है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, अत्याधुनिक शोध और रोगी देखभाल में उत्कृष्टता के प्रति संस्थान की निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना की।

श्री नड्डा ने पिछले दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पिछली सदी के अंत में जहां देश में केवल एक एम्स था, वहीं आज पूरे भारत में 23 एम्स संस्थान हैं। यह प्रत्येक क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा प्रशिक्षण के विस्तार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी प्रकार, स्नातक मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,29,000 और स्नातकोत्तर सीटें 31,000 से बढ़कर 78,000 हो गई हैं। श्री नड्डा ने कहा कि अगले पाँच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर 75,000 अतिरिक्त सीटें जुड़ने की उम्मीद है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जहाँ नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के आंकड़ों के अनुसार, मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 130 से घटकर 88 और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 39 से घटकर 27 हो गई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्‍चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) और राष्‍ट्रीय मृत्‍यु दर (एनएमआर) में भी क्रमशः 42 प्रतिशत और 39 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी देखी गई है, जो वैश्विक औसत से अधिक है।

उन्होंने आगे कहा कि लैंसेट की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में टीबी के मामलों में 17.7 प्रतिशत की गिरावट आई है।

श्री नड्डा ने अपने समापन भाषण में स्नातक छात्रों से शिक्षा और शोध में सक्रिय योगदान देने और अपने पेशेवर एवं नैतिक आचरण में उत्कृष्टता के माध्यम से एम्स की प्रतिष्ठित विरासत और ब्रांड को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने छात्रों को आजीवन शिक्षार्थी और नवप्रवर्तक बने रहने, चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाने और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर, नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी.के. पॉल ने कहा, “जिस समुदाय ने हमें पोषित किया है, उसे कुछ वापस देना हमारी एक गहन सामाजिक ज़िम्मेदारी है। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, उत्कृष्टता को अपना दैनिक अभ्यास और नवाचार को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाएँ।”

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे शिक्षा जगत में शामिल होने, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की अगली पीढ़ी को पढ़ाने, मार्गदर्शन करने और प्रेरित करने पर विचार करें, जिससे ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण में योगदान मिल सके। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सच्चा राष्ट्र निर्माण ज्ञान, करुणा और निरंतर सीखने की मज़बूत नींव पर टिका होता है।

इस दीक्षांत समारोह के दौरान, 326 स्नातकों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 50 पीएचडी स्कॉलर, 95 डीएम/एमसीएच विशेषज्ञ, 69 एमडी, 15 एमएस, 4 एमडीएस, 45 एमएससी, 30 एमएससी (नर्सिंग) और 18 एम.बायोटेक स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, एम्स में उनके अनुकरणीय योगदान और समर्पित सेवा के लिए सात डॉक्टरों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।

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