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डोनाल्ड ट्रम्प की 5 मिनट की फोन कॉल हुई लीक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
वाशिंगटन. डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ते मजबूत करने हैं, तो बात सिर्फ डिप्लोमेसी से नहीं बनेगी. इसके लिए सामने वाले को कुछ ऐसा करना होगा, जो ट्रंप को बेहद पसंद है. आप सोच रहे हैं कि आखिर ये कौन सी चीज है? तो इस बात का खुलासा किसी और ने नहीं किया बल्कि एक इंटरनेशनल फोन कॉल ने किया है. ये कॉल वैसे तो सिर्फ 5 मिनट की थी, लेकिन इसने दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी कमजोरी का खुलासा कर दिया है.
ये फोन कॉल रूस में अमेरिका के विशेष दूत और ट्रंप के करीबी स्टीव विटकॉफ और रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उषाकोव के बीच हुई थी. इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की ओर से इस कॉल का ट्रांसक्रिप्शन दुनिया के सामने रखा गया है. ये कॉल 14 अक्टूबर, 2025 की है और व्हाट्सऐप के जरिये की गई थी. किसी तरह ये रिकॉर्डिंग बाहर आ गई, जिसमें यूक्रेन के मसले पर दोनों डिप्लोमैट फोकस कर रहे थे.

क्या है डोनाल्ड ट्रंप की कमजोर नस?

दुनिया भर की सुर्खियों में रही इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉल के दौरान स्टीव विटकॉफ ने रूसी सलाहकार यूरी उषाकोव को ट्रंप और पुतिन के बीच फोन कॉल अरेंज करने की बात कही. ये कॉल बाद में की भी गई थी. विटकॉफ यहां पर बता रहे थे कि जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ट्रंप से बात करें, तो उन्हें खुलकर उनकी तारीफ करनी चाहिए. उन्हें गाजा पीस मेकिंग किंग के तौर पर सराहें और दुनियाभर में शांति का नेतृत्वकर्ता कहकर खुश करें. इसके तुरंत बाद ही पुतिन को उनके सामने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूसी मसौदा पेश करना है. विटकॉफ बार-बार कह रहे हैं कि पुतिन को ट्रंप की तारीफ करनी है और ट्रंप को एक रियल पीस मेकर कहना है. बात साफ है कि यहां विटकॉफ बताने की कोशिश कर रहे थे कि ट्रंप को अपनी तारीफ सुनना बेहद पसंद है.

तो क्या मुनीर-शहबाज को पता थी ये बात?

वैसे तो डोनाल्ड ट्रंप ने जब इसके बारे में सुना, तो उन्होंने कहा कि बातचीत का ये स्टैंडर्ड तरीका है और ये कहीं गलत नहीं है. रूस ने भी इसे शांति की कोशिशों को कमजोर करने की कोशिश कहा है. वैसे डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ सुनने की आदत को पाकिस्तान के नेता भी पकड़ चुके हैं. यही वजह है कि गाजा पीस समिट के बाद जब सभी नेता इकट्ठा हुए तो शहबाज शरीफ उनकी तारीफ में यूं खो गए कि उन्हें शब्द तक नहीं मिल रहे थे. ठीक इसी तरह आसिम मुनीर भी बार-बार अमेरिका जाकर अमेरिकी प्रेसिडेंट की चापलूसी करते हैं.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।