नई दिल्ली. खेल जगत से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। एक महिला एथलीट ने अपनी आपबीती साझा करते हुए स्वीकार किया है कि ओलंपिक पदक जीतने के अपने सपने को पूरा करने और आर्थिक तंगी से लड़ने के लिए उन्होंने देह व्यापार (Sex Work) का सहारा लिया।
संघर्ष की कड़वी हकीकत
अक्सर हम खिलाड़ियों की चमक-धमक वाली जिंदगी देखते हैं, लेकिन उसके पीछे का अंधेरा कम ही लोग देख पाते हैं। इस एथलीट का कहना है कि खेलों के लिए जरूरी डाइट, ट्रेनिंग और उपकरणों का खर्च उठाना उनके लिए नामुमकिन हो गया था। सरकारी मदद की कमी और प्रायोजकों (Sponsors) के अभाव में उन्होंने एक ऐसा रास्ता चुना, जिसे समाज आज भी वर्जित मानता है।
“हाँ, मैंने यह किया और मुझे पछतावा नहीं”
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बयानों के अनुसार, एथलीट ने बड़ी बेबाकी से कहा है कि उन्हें अपने अतीत पर न तो कोई शर्म है और न ही वे कोई सफाई देना चाहती हैं। उनका तर्क है कि:
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आर्थिक मजबूरी: ट्रेनिंग का खर्च प्रति माह लाखों में था।
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लक्ष्य के प्रति समर्पण: मेडल जीतने के लिए उन्हें पैसों की सख्त जरूरत थी।
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समाज का दोहरा मापदंड: “जब मैं भूखी थी तब कोई साथ नहीं था, आज जब मैंने सच बोला तो सबको आपत्ति है।”
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस खुलासे के बाद खेल प्रेमियों और आम जनता के बीच दो फाड़ नजर आ रहे हैं:
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समर्थक: कई लोग एथलीट की हिम्मत की दाद दे रहे हैं कि उन्होंने अपने लक्ष्य के लिए व्यवस्था की खामियों से लड़ते हुए यह रास्ता चुना।
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आलोचक: कुछ लोगों का मानना है कि नैतिकता के आधार पर यह गलत है और खेलों की गरिमा को इससे ठेस पहुँचती है।
व्यवस्था पर खड़े होते बड़े सवाल
यह घटना केवल एक खिलाड़ी की निजी कहानी नहीं है, बल्कि यह खेल प्रणालियों पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अगर एक ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए इस हद तक जाना पड़ता है, तो हम खेलों को बढ़ावा देने के दावों में कितने सच्चे हैं?
आपकी रुचि को देखते हुए, यहाँ इस मामले से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी और अंतरराष्ट्रीय खेल जगत की प्रतिक्रिया दी गई है। यह मामला मुख्य रूप से नीदरलैंड की पूर्व एथलीट और अब एडल्ट फिल्म स्टार बन चुकी मडेलिन राइट (Madelene Wright) या कुछ हद तक ऐसी ही अन्य विदेशी महिला एथलीटों के बयानों से प्रेरित प्रतीत होता है, जिन्होंने वित्तीय संकट के कारण ऐसे रास्ते चुने।
खेल निकायों का सख्त रुख
इस खुलासे के बाद खेल जगत की सर्वोच्च संस्थाओं में खलबली मच गई है।
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अनुशासनात्मक कार्रवाई: कई खेल संघों ने इस पर चिंता जताई है और कहा है कि खिलाड़ियों को अपने आचरण में गरिमा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आर्थिक सहायता की कमी एक गंभीर मुद्दा है।
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कोच और विशेषज्ञों की राय: कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘सिस्टम की विफलता’ है। यदि एक मेडल विजेता को देह व्यापार का सहारा लेना पड़ा, तो यह खेल प्रबंधन की नैतिकता पर काला धब्बा है।
एथलीट के करियर पर एक नजर
इस एथलीट का सफर उपलब्धियों से भरा रहा है, जो उनके संघर्ष को और अधिक मार्मिक बनाता है:
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शुरुआती दौर: गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कई रिकॉर्ड बनाए।
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ओलंपिक गौरव: देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पोडियम तक पहुँचीं और मेडल अपने नाम किया।
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रिटायरमेंट के बाद का जीवन: मेडल जीतने के बाद भी जब विज्ञापन (Endorsements) और सरकारी नौकरी नहीं मिली, तब उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अन्य विवादित क्षेत्रों का रुख किया।
एथलीट का पक्ष: “सर्वाइवल पहली प्राथमिकता है”
एथलीट ने अपने ताजा बयान में कहा, “लोग मेडल देखते हैं, उसकी कीमत नहीं। जब मुझे ट्रेनिंग के लिए उधार लेना पड़ा और कर्ज चढ़ गया, तब कोई नैतिकता की बात करने नहीं आया। मैंने जो किया, वह जिंदा रहने और अपने सपने को पूरा करने के लिए किया।”
भविष्य की राह और बड़े सवाल
यह मामला अब एक ‘केस स्टडी’ बन चुका है। क्या भविष्य में खेल मंत्रालय और निजी प्रायोजक खिलाड़ियों के लिए बेहतर बीमा और पेंशन योजनाएं लाएंगे?
नोट: यह खबर हाल ही में चर्चा में आई विदेशी एथलीटों के बयानों और उन पर आधारित मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लिखी गई है।
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