कोलकाता. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे पर हैं, जिसका मुख्य केंद्र 2026 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव हैं। सोमवार शाम को कोलकाता पहुँचते ही शाह ने चुनावी तैयारियों की कमान संभाल ली और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मैराथन बैठकें कीं।
संगठनात्मक मजबूती और ‘बूथ विजय’ पर जोर
अमित शाह ने साल्ट लेक स्थित भाजपा के राज्य मुख्यालय में पार्टी के कोर ग्रुप के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार सहित 26 वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
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बूथ स्तर पर पकड़: शाह ने ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान की समीक्षा की और कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रचार करने का निर्देश दिया।
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मतदाता सूची की समीक्षा: राज्य में चल रहे ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई, ताकि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
सांस्कृतिक और धार्मिक कनेक्ट
अपने दौरे के दौरान शाह केवल राजनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं। बुधवार को वे उत्तर कोलकाता के ऐतिहासिक ठंठनिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके अलावा, उनके किसी बंगाली आइकन (मनीषी) के आवास पर जाने की भी संभावना है, जिसे बंगाल की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के भाजपा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
प्रमुख चुनावी रणनीतियाँ
सूत्रों के अनुसार, शाह ने उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा है जहाँ भाजपा पिछले चुनाव में करीबी अंतर से हारी थी।
मतुआ और राजबंशी समुदाय: इन समुदायों को साधने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है।
भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था: टीएमसी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने का प्लान बनाया गया है।
नया नारा: भाजपा ने आगामी चुनावों के लिए ‘बांचते चाई, बीजेपी ताई’ (जीना चाहते हैं, इसलिए भाजपा) का नारा बुलंद किया है।
“पश्चिम बंगाल परिवर्तन के लिए पूरी तरह तैयार है। कार्यकर्ताओं का उत्साह बताता है कि 2026 में राज्य में बड़ा बदलाव होने वाला है।”
— अमित शाह (कोलकाता पहुँचने पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए)
जैसा कि आपने पिछले समाचार में भाजपा की तैयारियों के बारे में पढ़ा, यहाँ इस दौरे से संबंधित तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रतिक्रिया और भाजपा की जिलावार रणनीति का विस्तृत विवरण दिया गया है:
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तीखी प्रतिक्रिया
अमित शाह के दौरे पर सत्ताधारी दल टीएमसी ने हमलावर रुख अपनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने शाह के दौरे को ‘राजनीतिक पर्यटन’ करार दिया है।
“बाहरी बनाम भीतरी”: टीएमसी ने एक बार फिर ‘बोहिरागतो’ (बाहरी) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दिल्ली के नेता बंगाल की संस्कृति को नहीं समझते।
बकाये का मुद्दा: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि शाह बंगाल तो आ रहे हैं, लेकिन केंद्र द्वारा रोके गए मनरेगा (MGNREGA) और आवास योजना के फंड पर वे चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।
“विभाजनकारी राजनीति”: टीएमसी का आरोप है कि शाह केवल ध्रुवीकरण करने आए हैं, जबकि बंगाल के लोग विकास और शांति चाहते हैं।
भाजपा का जिलावार ‘मिशन 2026’ डेटा प्लान
अमित शाह ने समीक्षा बैठक में बंगाल को भौगोलिक और राजनीतिक आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा है:
उत्तर बंगाल (बीजेपी का गढ़)
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लक्ष्य: कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में अपनी पकड़ बरकरार रखना।
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रणनीति: राजबंशी और चाय बागान श्रमिकों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना। शाह ने निर्देश दिया है कि यहाँ के सांसदों को स्थानीय विकास कार्यों की सीधी निगरानी करनी होगी।
दक्षिण बंगाल (सबसे बड़ी चुनौती)
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लक्ष्य: कोलकाता, हावड़ा, दक्षिण 24 परगना और हुगली।
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रणनीति: यहाँ भाजपा काफी कमजोर रही है। शाह ने शहरी मध्यम वर्ग को आकर्षित करने के लिए स्थानीय भ्रष्टाचार और नागरिक सुविधाओं (जैसे कचरा प्रबंधन और पानी) को बड़ा मुद्दा बनाने को कहा है।
जंगलमहल और मतुआ बेल्ट
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लक्ष्य: झारग्राम, पुरुलिया, बांकुरा और नादिया (मतुआ क्षेत्र)।
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रणनीति: CAA के कार्यान्वयन और आदिवासी कल्याण की योजनाओं को घर-घर पहुँचाना। मतुआ समुदाय के बीच भाजपा अपने वोट बैंक को फिर से संगठित करने के लिए ‘नागरिकता’ के वादे को दोहराएगी।
चुनावी आँकड़ों पर विशेष नज़र
शाह ने उन 75 विधानसभा सीटों की सूची मांगी है जहाँ 2021 के चुनाव में भाजपा 5,000 से कम वोटों के अंतर से हारी थी। इन क्षेत्रों में पार्टी अब ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ (सूक्ष्म प्रबंधन) करेगी।
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