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कानपुर: मेहरबान सिंह पुरवा में सामाजिक सद्भाव बैठक संपन्न, प्रबुद्धजनों ने दिया समरस समाज का संदेश

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कानपुर । सोमवार, 1 जून 2026

समाज के विभिन्न वर्गों, बिरादरियों और संगठनों के बीच आपसी समन्वय और भाईचारे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज मेहरबान सिंह पुरवा स्थित विधि महाविद्यालय में एक महत्वपूर्ण सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में क्षेत्र के प्रबुद्धजनों, समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों के प्रमुखों ने सहभागिता कर राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता पर अपने बहुमूल्य विचार साझा किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन तथा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्पण के साथ विधिवत रूप से हुआ। इसके पश्चात, सौरभ झा जी ने राष्ट्रभक्ति और एकता से ओतप्रोत ‘सामाजिक सद्भाव गीत’ प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह में ऊर्जा का संचार किया। उद्घाटन सत्र के बाद सभी उपस्थित बंधुओं का परिचय सत्र हुआ और मुख्य विषय पर खुली चर्चा शुरू हुई।

सामाजिक समरसता और पंच परिवर्तन पर मंथन

यह बैठक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चलाए जा रहे ‘पंच परिवर्तन’ (जिसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं) के संकल्पों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समाज को वैचारिक रूप से मजबूत करने के लिए वक्ताओं ने कई व्यावहारिक व्यावहारिक सुझाव रखे।

प्रबुद्ध वर्ग के प्रमुख विचार और सामाजिक सूत्र:

  • त्योहारों से बढ़ेगी सामाजिक निकटता: बैठक को संबोधित करते हुए भाग कार्यवाह सुशील कटियार ने कहा, “हमें अपने सभी पर्व और त्योहार व्यक्तिगत दायरों से बाहर निकलकर पूरे समाज के साथ मिलजुल कर मनाने चाहिए। जब हम खुशियों को साझा करते हैं, तो सामाजिक सद्भाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।”

  • धार्मिक एकत्रीकरण और सुंदरकांड का महत्व: स्थानीय निवासी शिवाकांत द्विवेदी ने धर्म को समाज जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “जिस प्रकार मुस्लिम समाज के बंधु प्रत्येक शुक्रवार को मस्जिद में नमाज़ के लिए और ईसाई समाज के लोग रविवार को चर्च में प्रार्थना के लिए एकत्र होते हैं, उसी प्रकार हमें (हिंदू समाज को) भी प्रत्येक मंगलवार को अपने नजदीकी मंदिर में एकत्रित होकर सामूहिक सुंदरकांड का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह एकत्रीकरण आपसी भेदभाव को मिटाकर सद्भाव को प्रगाढ़ करेगा।”

  • अपरिचित को मित्र बनाने का संकल्प: शिक्षक मनोज शुक्ला ने व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता की शुरुआत व्यक्तिगत व्यवहार से होती है। हमें सबसे पहले अपने आस-पास के अपरिचित व्यक्ति को परिचित बनाना चाहिए और फिर उस परिचय को अटूट मित्रता में बदलना चाहिए।

  • सेवा कार्यों की मिसाल: समाजसेवी केशू पासी ने पुराने संकट काल को याद करते हुए बताया कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने ‘वरुण विहार सेवा बस्ती’ को गोद लेकर जिस प्रकार गरीब व असहाय परिवारों के लिए निरंतर भोजन और राशन की व्यवस्था की थी, वह सामाजिक समरसता और सेवा भाव की सबसे बड़ी मिसाल है।

  • कला और नाट्य मंचन का माध्यम: रेलवे लोको शेड के इंजीनियर रितिक कुमार ने कहा कि सामाजिक सद्भाव को कला के माध्यम से भी व्यापक रूप दिया जा सकता है। उन्होंने ‘संस्कार भारती’ जैसी संस्थाओं का उदाहरण दिया जो नाट्य मंचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही हैं।

मार्गदर्शक मंडल एवं व्यवस्था सहयोग

यह भव्य कार्यक्रम नगर के माननीय संघचालक राकेश सचान एवं अंजनी बाजपेई के संरक्षण और कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के सफल संचालन का दायित्व नगर कार्यवाह कुन्दन सिंह ने निभाया तथा कार्यक्रम के संयोजक सहनगर कार्यवाह योगेन्द्र सचान रहे।

कार्यक्रम की आंतरिक एवं भोजन-पानी की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभालने में सेवा प्रमुख डॉ. धिरेन्द्र सचान, मर्दनपुर बस्ती प्रमुख मनिष दुबे, व्यवस्था प्रमुख धर्मपाल, सद्भाव प्रमुख प्रदीप दूबे, पिपौरी बस्ती प्रमुख राम श्रीवास्तव तथा अंबेडकर बस्ती प्रमुख कैलाश नाथ वर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई।

बैठक में उपस्थित अन्य गणमान्य नागरिक:

इस समरसता बैठक में सोहनलाल, डॉ. विकास उत्तम (अंजली मेडिकल एवं हॉस्पिटल), अजीत अवस्थी (ग्रामीण विकास), शाखा कार्यवाह दिनेश राय एवं विरेन्द्र मिश्रा, रवि मिश्रा (विश्व हिंदू परिषद), मयंक त्रिपाठी (हिंदू जागरण मंच), रेलवे इंजीनियर रामकुमार प्रजापति, जितेन्द्र कठेरिया, लेखक कन्हैया लाल कुशवाहा, गुलाटी राम, लोको पायलट अरूण राठौड़, अभिषेक कुमार, शुभम, सोनू तिवारी, शोभित राजपूत, राजभान सिंह, उदयभान सिंह, कृष्णा शर्मा, नरेन्द्र कटियार सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय समाज जन और राष्ट्रभक्त उपस्थित रहे।

शिकंजी वितरण के साथ गरिमामयी समापन

विचार-विमर्श सत्र के उपरांत सामूहिक रूप से भारत माता की आरती की गई, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के नारों से गुंजायमान हो उठा। इसके बाद विद्यार्थी विभाग के कार्यकर्ता हर्ष नंदन एवं सुमित पटेल जी द्वारा भीषण गर्मी को देखते हुए सभी आगंतुकों और समाज के बंधुओं को शीतल शिकंजी का वितरण किया गया। सभी उपस्थित जनों ने समाज में समरसता की इस अलख को निरंतर जगाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।

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