शनिवार, अगस्त 15 2026 | 05:25:41 AM
Breaking News
Home / राज्य / उत्तरप्रदेश / गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी: लखनऊ में स्थापित होगा एडवांस्ड सीड सेंटर, ISMA और ICAR-ISRI के बीच ऐतिहासिक समझौता

गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी: लखनऊ में स्थापित होगा एडवांस्ड सीड सेंटर, ISMA और ICAR-ISRI के बीच ऐतिहासिक समझौता

Follow us on:

लखनऊ । शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की किस्मत बदलने और चीनी उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। Indian Sugar & Bio-Energy Manufacturers Association (ISMA) और ICAR-Indian Sugarcane Research Institute (ICAR-ISRI), Lucknow ने हाथ मिलाते हुए लखनऊ में ‘Advanced Centre for Quality Sugarcane Seed Production’ स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत ₹80 करोड़ है, जिसमें ISMA और ICAR-ISRI दोनों की 50-50 प्रतिशत (₹40-40 करोड़) की समान भागीदारी होगी। यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उपोष्णकटिबंधीय (Subtropical) गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के किसानों के लिए वरदान साबित होगी।
यह नया केंद्र लखनऊ स्थित ICAR-ISRI परिसर में बनाया जाएगा। इसका मुख्य ध्येय चीनी मिलों और गन्ना किसानों को रोग-मुक्त (Disease-Free), आनुवंशिक रूप से शुद्ध (Genetically Pure) और उच्च उपज देने वाले (High-Yielding) बीज उपलब्ध कराना है।
प्रायः प्रयोगशालाओं में तैयार की गई गन्ने की नई और बेहतर किस्में खेतों तक पहुँचने में वर्षों का समय ले लेती हैं। यह सेंटर इस अंतर को खत्म करेगा और नई वैरायटीज़ के प्रसार (Multiplication) की गति को कई गुना बढ़ा देगा।
[लैब अनुसंधान (Research)] ──► [एडवांस्ड सीड सेंटर (Seed Centre)] ──► [चीनी मिलें (Sugar Mills)] 
──► [किसान का खेत (Farmers)]

सेंटर की प्रमुख विशेषताएं और आधुनिक तकनीकें

इस अत्याधुनिक केंद्र में आधुनिक कृषि विज्ञान की तकनीकों का समावेश होगा:
  1. आधुनिक प्रजनन तकनीकें: टिश्यू कल्चर (Tissue Culture), बड चिप (Bud Chip) और केन नोड (Cane Node) तकनीक से कम समय और कम बीज लागत में पौधों का तेजी से उत्पादन होगा।
  2. नर्सरी रेजिंग और हार्डनिंग (Hardening): लैब में बने पौधों को खेतों के माहौल के अनुकूल तैयार करना।
  3. डिजीज इंडेक्सिंग (Disease Indexing): बीजों में लगने वाली घातक बीमारियों (जैसे लाल सड़न/Red Rot) की समय से पहले पहचान और रोकथाम।
  4. डिजिटल ट्रैसेबिलिटी और टैगिंग: बीज कहाँ से आया है, उसकी शुद्धता का स्तर क्या है—इसकी जानकारी डिजिटल टैगिंग के जरिए पारदर्शी रहेगी।
  5. ट्रेनिंग एवं क्षमता निर्माण: चीनी मिलों के ‘केन डेवलपमेंट पर्सनल’ को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे किसानों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन दे सकें।

गन्ना उत्पादकता और रिकवरी दर में आएगा उछाल

मापदंड (Parameter) पुरानी स्थिति (Conventional) एडवांस्ड सेंटर के बाद (Expected Impact)
बीज की उपलब्धता सीमित व देरी से तीव्र व समयबद्ध आपूर्ति (Timely Supply)
बीज की गुणवत्ता रोग की संभावना 100% डिजीज-फ्री व जेनेटिकली प्योर
फसल उत्पादकता सामान्य उपज प्रति एकड़ उच्च उत्पादकता (High Yield)
शुगर रिकवरी औसत उच्च चीनी रिकवरी (Better Sugar Recovery)
किसानों की आय सीमित लाभ उत्पादन लागत में कमी व आय में बढ़ोतरी
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार:
“गन्ना किसान हमेशा हमारी हर पहल के केंद्र में है। गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री ही उच्च उत्पादकता, बेहतर चीनी रिकवरी और मजबूत कृषि आय की शुरुआत है। यह साझेदारी प्रयोगशाला के वैज्ञानिक ज्ञान को धरातल पर किसानों तक पहुँचाने का काम करेगी।”

उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र के लिए क्यों खास है यह कदम?

उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य है। हाल के वर्षों में गन्ने की कुछ प्रमुख किस्मों (जैसे Co 0238) में बीमारियों का प्रकोप देखा गया है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
ऐसे समय में रोग-मुक्त, उच्च गुणवत्ता वाली नई किस्मों की उपलब्धता से:
  • फसल में बीमारियों का खतरा न्यूनतम होगा।
  • प्रति एकड़ गन्ने का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों का लाभ बढ़ेगा।
  • चीनी मिलों को बेहतर गुणवत्ता का गन्ना मिलेगा, जिससे एथेनॉल और चीनी उत्पादन सुचारू होगा।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: लखनऊ में बनने वाला यह सीड सेंटर किन दो संस्थाओं का संयुक्त प्रयास है?
उत्तर: यह केंद्र Indian Sugar & Bio-Energy Manufacturers Association (ISMA) और ICAR-Indian Sugarcane Research
Institute (ICAR-ISRI) का एक संयुक्त प्रयास है।
Q2: इस परियोजना पर कितना खर्च आएगा?
उत्तर: इस परियोजना की कुल लागत ₹80 करोड़ है, जिसे ISMA और ICAR-ISRI दोनों 50-50% के अनुपात में वहन करेंगे।
Q3: इस सेंटर से किसानों को सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?
उत्तर: किसानों को समय पर बीमारियों से मुक्त, उच्च उपज देने वाली और शुद्ध गन्ने की किस्में मिलेंगी, जिससे उनकी फसल का उत्पादन और आय दोनों बढ़ेगी।
Q4: सीड ट्रैसेबिलिटी (Seed Traceability) क्या है?
उत्तर: इसमें डिजिटल टैगिंग के माध्यम से किसानों को यह पता रहेगा कि बीज की उत्पत्ति कहाँ से हुई है और उसकी शुद्धता का स्तर क्या है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध सूचनाओं और हालिया MoU के आधार पर केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। कृषि तकनीकों, बीज किस्मों या योजनाओं
के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी के लिए किसान भाई अपने नजदीकी चीनी मिल अथवा कृषि अनुसंधान केंद्र से संपर्क करें।
मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

‘1947 में मोदी या पटेल PM होते तो नहीं होता भारत का विभाजन’: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर CM योगी का बड़ा बयान

लखनऊ | शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विभाजन विभीषिका …