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अधिसूचना जारी: 27 राज्यसभा और 3 राज्यों की विधान परिषद सीटों पर 18 जून को घमासान, जानें पूरा शेड्यूल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली । सोमवार, 1 जून 2026

भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को गति देते हुए चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने सोमवार को देश के अलग-अलग राज्यों में खाली हो रही 27 राज्यसभा सीटों और 3 राज्यों की विधान परिषद (Legislative Council) सीटों के लिए आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है। इन सभी महत्वपूर्ण सीटों के लिए आगामी 18 जून को मतदान होना तय हुआ है।

राजनीतिक गलियारों में इस घोषणा के बाद से ही हलचल तेज हो गई है, क्योंकि राज्यसभा और विधान परिषद के समीकरण राज्यों की सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

18 जून को ही वोटिंग और उसी दिन शाम को नतीजे

चुनाव आयोग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मतदान के दिन सभी केंद्रों पर सुरक्षा और पारदर्शिता के कड़े इंतजाम रहेंगे।

  • मतदान का समय: 18 जून को सुबह 8:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक वोट डाले जाएंगे।

  • मतगणना (Counting): हमेशा की तरह राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों में वोटिंग खत्म होने के ठीक एक घंटे बाद, यानी उसी दिन (18 जून) शाम 5:00 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। देर रात तक सभी सीटों के परिणाम स्पष्ट होने की उम्मीद है।

चुनाव का पूरा टाइमटेबल (Election Schedule)

नामांकन पत्र दाखिल करने से लेकर नाम वापसी तक की पूरी प्रक्रिया बेहद संक्षिप्त और सुव्यवस्थित रखी गई है:

चुनावी चरण (Event) तारीख और निर्धारित समय (Date & Time)
नामांकन की शुरुआत 1 जून (सुबह 11:00 बजे से)
नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून (दोपहर 3:00 बजे तक)
नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) 9 जून
नाम वापसी की अंतिम तिथि 11 जून
मतदान का दिन (Voting) 18 जून (सुबह 8:00 से शाम 4:00 बजे)
मतगणना और परिणाम (Results) 18 जून (शाम 5:00 बजे से शुरू)

आखिर क्यों हो रहे हैं ये चुनाव? द्विवार्षिक और उपचुनाव का गणित

कई पाठकों के मन में यह सवाल उठता है कि ये चुनाव अचानक क्यों कराए जा रहे हैं? चुनाव आयोग के मुताबिक इसके पीछे दो मुख्य वजहें हैं:

1. द्विवार्षिक चुनाव (Biennial Elections)

राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी पूरी तरह भंग नहीं होता। इसके एक-तिहाई सदस्यों का कार्यकाल हर दो साल में समाप्त होता है। इस बार 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिन्हें भरने के लिए यह नियमित (द्विवार्षिक) चुनाव कराया जा रहा है। इसी तरह बिहार में राज्य विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव हो रहे हैं।

2. उपचुनाव (By-elections)

जब कोई सीट किसी सदस्य के इस्तीफे, मृत्यु या अयोग्यता के कारण समय से पहले खाली हो जाती है, तो वहां उपचुनाव कराया जाता है। इस अधिसूचना के तहत महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा में राज्यसभा की सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं, जबकि बिहार विधान परिषद की 1 सीट के लिए भी उपचुनाव निर्धारित है।

कर्नाटक का सियासी समीकरण: दिग्गजों का कार्यकाल खत्म

इस पूरे चुनावी शेड्यूल में कर्नाटक पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। कर्नाटक की 4 राज्यसभा और 7 विधान परिषद सीटों के लिए भी सोमवार को ही अधिसूचना जारी की गई है।

ऐतिहासिक संदर्भ : इस अधिसूचना के तहत कर्नाटक विधानसभा के सदस्य ‘विधान सौध’ में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मूल रिकॉर्ड के अनुसार, कर्नाटक से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इरन्ना कडाडी और नारायण कोरगप्पा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे तथा जनता दल (सेक्युलर) के एच.डी. देवेगौड़ा का कार्यकाल 25 जून को समाप्त होने के चलते ये सीटें खाली हुई हैं। वहीं, विधायकों द्वारा चुने गए 7 विधान परिषद सदस्यों (जिसमें कांग्रेस के गोविंद राजू, नसीर अहमद, तिप्पन्नप्पा, बी.के. हरिप्रसाद और भाजपा के एन. नागराजू, प्रताप सिम्हा नायक के., व सुनील वल्ल्यापुर शामिल हैं) का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है।

संबंधित लिंक्स (External Resources)

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(नोट: चूंकि यह एक लाइव चुनावी प्रक्रिया है, उम्मीदवारों की अंतिम सूची 11 जून को नाम वापसी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।)

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।