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कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी: जानिए NH-34 ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का रूट, लागत और बड़े फायदे

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कानपुर बुधवार, 1 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर और बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार कबरई के बीच यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (NH-34) के कानपुर-कबरई सेक्शन को 4/6 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में विकसित करने के लिए आधिकारिक मुहर लगा दी गई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी साझा की। यह महत्वाकांक्षी परियोजना केंद्र सरकार के भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के व्यापारिक तथा खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को सीधे आपस में जोड़ेगी।

🛠️ BOT मॉडल पर ₹7,145.14 करोड़ की लागत से होगा तैयार

यह मेगा हाईवे प्रोजेक्ट ‘बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर’ (BOT – Toll) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कार्यान्वित किए जाने वाले इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹7,145.14 करोड़ है।

इस परियोजना की इंजीनियरिंग डिजाइन को दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया गया है, ताकि मौजूदा सड़क के बुनियादी ढांचे का भी सर्वोत्तम उपयोग किया जा सके:

  • ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (New Alignment): इस प्रोजेक्ट के तहत 117.70 किलोमीटर पूरी तरह से नए एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। यह नया संरेखण (Alignment) घने रिहायशी इलाकों और ट्रैफिक वाले कस्बों से बचते हुए खुले मैदानों से गुजरेगा।

  • ब्राउनफील्ड सेक्शन (Existing Stretch): इसके साथ ही 123.86 किलोमीटर के मौजूदा ब्राउनफील्ड सेक्शन का आधुनिकीकरण, संचालन और चौड़ीकरण करते हुए उसका अनुरक्षण (O&M) किया जाएगा।

पुल और सर्विस रोड का नेटवर्क

हाईवे को पूरी तरह सुरक्षित और बाधा रहित बनाने के लिए इस पर 16 बड़े पुल और 1 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण प्रस्तावित है। स्थानीय यातायात और ग्रामीणों की सुविधा के लिए हाईवे के दोनों ओर कुल 12.002 किलोमीटर की सर्विस रोड भी बनाई जाएगी, जिससे मुख्य हाईवे पर स्थानीय वाहनों के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके।

⚡ यात्रा समय में 58% की भारी कटौती: 3.5 घंटे का सफर महज 90 मिनट में

वर्तमान में कानपुर से कबरई के बीच टू-लेन और भारी वाहनों के दबाव के कारण यात्रियों को करीब साढ़े तीन घंटे का समय लग जाता है। इस मार्ग पर वाहनों की औसत गति महज 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा ही रह पाती है।

नया 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (जिसे भविष्य में 6-लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान शामिल है) बन जाने के बाद इस पूरे रूट पर गाड़ियों की डिजाइन स्पीड 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। परिणाम स्वरूप:

  1. कानपुर से कबरई की दूरी महज डेढ़ घंटे (1.5 घंटे) में पूरी हो सकेगी।

  2. भारी कमर्शियल वाहनों और डंपरों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।

  3. लॉजिस्टिक्स लागत (Transportation Cost) में भारी कमी आएगी और बड़े पैमाने पर ईंधन की बचत होगी।

🌐 पीएम गतिशक्ति: औद्योगिक हब और माइनिंग बेल्ट को मिलेगी नई रफ्तार

यह कॉरिडोर पूरी तरह से प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM GatiShakti) के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह हाईवे क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण नोड्स को आपस में लिंक करेगा:

  • 16 इकोनॉमिक नोड्स: जिसमें उन्नाव, बंथर, पनकी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप तथा कानपुर नगर नोड शामिल हैं।

  • 9 सोशल नोड्स और 10 लॉजिस्टिक्स नोड्स: इस लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के जरिए 7 प्रमुख रेलवे स्टेशन (जैसे महोबा, हमीरपुर, बांदा आदि) और 3 महत्वपूर्ण एयरपोर्ट (कानपुर, चकेरी और खजुराहो) की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

कबरई माइनिंग बेल्ट को सीधा फायदा: कबरई और हमीरपुर का क्षेत्र गिट्टी, बालू और ग्रेनाइट जैसे खनिजों के व्यापार के लिए जाना जाता है। इस हाईवे के निर्माण से निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की देशव्यापी सप्लाई चेन बेहद मजबूत होगी।

💼 रोजगार के बंपर अवसर: 1.2 करोड़ मानव-दिवस का सृजन

कैबिनेट ब्रीफिंग में दी गई जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण चरण के दौरान बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। अनुमान है कि प्रति लेन प्रति किलोमीटर के हिसाब से 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होंगे। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट लगभग 1.2 करोड़ व्यक्ति-दिवस (Person-days) का रोजगार पैदा करेगा, जो बुंदेलखंड के युवाओं के लिए एक बड़ी राहत होगी।

वर्तमान स्थिति और जमीन अधिग्रहण:

NHAI कानपुर के परियोजना निदेशक पंकज यादव ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट और सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से परियोजना स्वीकृत होने के बाद अब जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और टेंडरिंग की प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि धरातल पर निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।

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