वाराणसी | मंगलवार, 1 सितंबर 2026
ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से जुड़े स्वामित्व और वक्फ संपत्ति विवाद में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। वाराणसी की संबंधित अदालत में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। वक्फ बोर्ड ने हिंदू पक्ष की याचिकाओं की सुनवाई (maintainability) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत बहस और आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तिथि तय की है।
विवाद की पृष्ठभूमि और वक्फ बोर्ड का रुख
ज्ञानवापी परिसर का मुद्दा दशकों से कानूनी और धार्मिक चर्चाओं के केंद्र में रहा है। मस्जिद पक्ष और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का मुख्य तर्क यह है कि यह संपत्ति अभिलेखों में वक्फ के रूप में दर्ज है और इसका प्रबंधन लंबे समय से मुस्लिम समुदाय द्वारा किया जा रहा है।
वक्फ बोर्ड ने अदालत के समक्ष मुख्य रूप से दो प्रमुख कानूनी आपत्तियां रखी हैं:
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वक्फ कानून (Waqf Act, 1995): बोर्ड का कहना है कि किसी भी वक्फ संपत्ति से जुड़े विवाद को सुनने का क्षेत्राधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल के पास होता है, न कि सामान्य सिविल कोर्ट के पास।
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पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act, 1991): इस कानून के प्रावधानों के तहत 15 अगस्त 1947 को मौजूद किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। इसलिए हिंदू पक्ष की याचिकाएं कानूनी रूप से पोषणीय (maintainable) नहीं हैं।
हिंदू पक्ष के दावे और ASI सर्वे के निष्कर्ष
दूसरी तरफ, हिंदू पक्ष (याचिकाकर्ताओं) का तर्क है कि पूरा ज्ञानवापी परिसर प्राचीन आदि विश्वेश्वर मंदिर का हिस्सा है। उनके अनुसार:
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किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाई गई इमारत कानूनी रूप से वैध ‘वक्फ संपत्ति’ नहीं हो सकती, क्योंकि इस्लाम के सिद्धांतों के तहत बिना स्वामित्व वाली ज़मीन पर वक्फ स्थापित नहीं किया जा सकता।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की साइंटिफिक सर्वे रिपोर्ट में भी इस बात के प्रमाण मिले हैं कि वर्तमान मस्जिद ढांचे के निर्माण से पहले वहां एक विशाल हिंदू मंदिर मौजूद था।
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परिसर के तहखानों (जैसे व्यास जी का तहखाना) और दीवारों पर मिले धार्मिक चिह्न यह साबित करते हैं कि वहां पूजा-अर्चना की परंपरा निरंतर बनी रही है।
18 सितंबर की सुनवाई में क्या होगा खास?
18 सितंबर को होने वाली आगामी सुनवाई में अदालत निम्नलिखित पहलुओं पर अंतिम विचार कर सकती है:
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पोषणीयता (Maintainability) पर निर्णय: अदालत पहले यह तय करेगी कि वक्फ बोर्ड की आपत्तियों के आधार पर हिंदू पक्ष की याचिकाएं खारिज की जाएं या उन पर आगे सुनवाई जारी रखी जाए।
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दस्तावेजी साक्ष्य: दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलों के समर्थन में अतिरिक्त राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ अभिलेख पेश करने का अवसर मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: ज्ञानवापी मामले में वक्फ बोर्ड ने क्या आपत्ति जताई है?
उत्तर: वक्फ बोर्ड का कहना है कि ज्ञानवापी संपत्ति वक्फ अधिनियम और 1991 के पूजा स्थल अधिनियम के तहत सुरक्षित है, इसलिए सिविल कोर्ट को हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर सुनवाई का अधिकार नहीं है।
Q2: 18 सितंबर की तारीख क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: 18 सितंबर को अदालत वक्फ बोर्ड की आपत्तियों पर दोनों पक्षों की आगे की दलीलें सुनेगी और याचिका की पोषणीयता (maintainability) पर महत्वपूर्ण आदेश दे सकती है।
Q3: इस मामले में 1991 का ‘Places of Worship Act’ क्या भूमिका निभाता है?
उत्तर: यह कानून 15 अगस्त 1947 के समय मौजूद धार्मिक स्थलों की स्थिति बनाए रखने का आदेश देता है। मस्जिद पक्ष इसके आधार पर केस खारिज करने की मांग करता है, जबकि हिंदू पक्ष का कहना है कि मंदिर का स्वरूप कभी खत्म ही नहीं हुआ था।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख ज्ञानवापी और वक्फ बोर्ड से संबंधित अदालती कार्यवाही और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कानूनी दलीलों की जानकारी पर आधारित है। मामला न्यायालय में विचाराधीन (sub-judice) है और अंतिम फैसला अदालत के आधिकारिक निर्णय पर निर्भर करेगा।
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