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केंद्र सरकार ने बदला पेट्रोल, डीजल और ATF का एक्सपोर्ट ड्यूटी स्ट्रक्चर: जानिए घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर

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पेट्रोल पंप पर तेल भरवाती गाड़ियाँ और पेट्रोलियम रिफाइनरी - निर्यात शुल्क बदलाव 2026
मुंबई | मंगलवार, 1 सितंबर 2026
केंद्र सरकार ने 1 सितंबर 2026 से देश के पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क (Special Additional Excise Duty / Export Duty) में अहम संशोधन किए हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लागू लेवी में नया शुल्क ढांचा प्रभावी हो गया है। यह समीक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू उपलब्धता को संतुलित करने के उद्देश्य से की गई है।

1. पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात शुल्क में क्या बदलाव हुआ?

सरकार की ओर से हर 15 दिनों (पाक्षिक समीक्षा) पर पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में संशोधन किया जाता है। 1 सितंबर 2026 से लागू नई दरों के अनुसार:
  • पेट्रोल (Petrol Export Duty): पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क को शून्य (Nil) से बढ़ाकर ₹1.50 प्रति लीटर कर दिया गया है।
  • डीजल (Diesel Export Duty): डीजल पर लगने वाली कुल एक्सपोर्ट लेवी को बढ़ाकर ₹25 प्रति लीटर तय किया गया है।
  • एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF Export Duty): हवाई ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क में कटौती की गई है और इसे घटाकर ₹19 प्रति लीटर कर दिया गया है।
यह दरें 1 सितंबर 2026 से प्रभावी हैं और अगले पखवाड़े (15 दिन) की समीक्षा तक लागू रहेंगी।

2. घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आम जनता पर असर

कई उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस फैसले से पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे?
मुख्य बिंदु: इस नीतिगत फैसले का आम उपभोक्ताओं की जेब या घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा दरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह एक्सपोर्ट ड्यूटी केवल विदेश भेजे जाने वाले रिफाइंड ईंधन पर लागू होती है, जिससे रिफाइनिंग कंपनियों (जैसे रिलायंस, नयरा या सार्वजनिक तेल कंपनियां) के निर्यात मार्जिन पर असर पड़ता है, आम खुदरा कीमतों पर नहीं।

3. एक्सपोर्ट ड्यूटी में बार-बार बदलाव क्यों करती है सरकार?

पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क (जिसे विंडफॉल टैक्स के रूप में भी जाना जाता है) को समय-समय पर संशोधित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
  1. घरेलू उपलब्धता बनाए रखना: घरेलू रिफाइनरियों द्वारा विदेशी बाजारों में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में स्थानीय बाजार में ईंधन की कमी न हो, इसे सुनिश्चित करना।
  2. अतिरिक्त लाभ पर नियंत्रण (Windfall Gain Tax): जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिफाइंड मार्जिन (Crack Spreads) बढ़ते हैं, तब निजी व सरकारी रिफाइनरियों को मिलने वाले असाधारण अप्रत्याशित लाभ को नियंत्रित करना।
  3. अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का संतुलन: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दरों के आधार पर पाक्षिक समीक्षा के माध्यम से राजस्व और आपूर्ति में संतुलन साधना।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. क्या 1 सितंबर 2026 से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ेंगी?
उत्तर: नहीं, घरेलू पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन की एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह बदलाव केवल निर्यात की जाने वाली खेपों पर लागू होता है।
Q2. ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाने का क्या मतलब है?
उत्तर: ATF पर निर्यात शुल्क ₹19 प्रति लीटर करने से भारतीय रिफाइनरियों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों या विदेशी बाजारों में हवाई ईंधन निर्यात करना तुलनात्मक रूप से सुलभ होगा।
Q3. सरकार निर्यात शुल्क की समीक्षा कितने दिनों में करती है?
उत्तर: केंद्र सरकार हर 15 दिनों (fortnightly) पर वैश्विक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की दरों के आधार पर एक्सपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा करती है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत तथ्य और आंकड़े सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचनाओं पर उपलब्ध व्यापारिक समाचारों के विश्लेषण पर आधारित हैं। खुदरा दरों व आधिकारिक सरकारी आदेशों की पुष्टि हेतु संबंधित मंत्रालयों की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति अवश्य देखें।
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