मुंबई । मंगलवार, 1 सितंबर 2026
भारत के सबसे बड़े निजी और व्यावसायिक बंदरगाह मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port) पर खाली कंटेनर यार्ड ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन सेवा रोक से देश के आयात-निर्यात (EXIM) कारोबार में एक बड़ा लॉजिस्टिक्स संकट पैदा हो गया है। 28 अगस्त की आधी रात से जारी इस हड़ताल के कारण रोजाना करीब 5,000 खाली कंटेनर अटक रहे हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है।
विवाद की असली वजह: APSEZ का नया निर्देश
यह विवाद अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) द्वारा जारी उस ट्रेड एडवाइजरी के बाद शुरू हुआ, जिसमें 1 सितंबर से पोर्ट सीमा के बाहर स्थित ऑफ-डॉक खाली कंटेनर डिपो (Off-dock Depots) को फ्रीज करने का आदेश दिया गया है।
APSEZ का कहना है कि डिपो कोड के दुरुपयोग को रोकने, सुरक्षा बढ़ाने और पोर्ट क्षेत्र में ट्रैफिक भीड़ को कम करने के लिए खाली कंटेनरों का रखरखाव अब केवल पोर्ट SEZ के भीतर निर्धारित यार्ड में होगा। दूसरी ओर, मुंद्रा एम्प्टी कंटेनर यार्ड्स एसोसिएशन का तर्क है कि इससे ऑफ-डॉक डिपो में करोड़ों रुपये का निवेश बेकार हो जाएगा और 5,000 से अधिक कर्मचारियों तथा ट्रांसपोर्ट चालकों की आजीविका पर संकट आ जाएगा।
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│ APSEZ का नया निर्देश (1 Sep) │
│ (कंटेनर पोर्ट SEZ के अंदर ही रहेंगे) │
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│ यार्ड ऑपरेटरों का विरोध (28 Aug) │
│ (सेवाएं पूरी तरह ठप की गईं) │
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│ Import पर असर │ │ Export पर असर │
│ • खाली कंटेनर वापसी में बाधा │ │ • फैक्ट्री-स्टफिंग के लिए │
│ • डिटेंशन चार्जेस का खतरा │ │ कंटेनर अनुपलब्ध │
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EXIM गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स पर चौतरफा प्रभाव
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आयातित कंटेनरों की वापसी ठप: आयातित माल खाली होने के बाद कंटेनरों को यार्ड में जमा करना मुश्किल हो रहा है, जिससे आयातकों पर कंटेनर होल्ड करने का दैनिक हर्जाना (Detention Charges) बढ़ रहा है।
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निर्यात शिपमेंट में भारी देरी: फैक्ट्रियों में माल की स्टफिंग (Factory Stuffing) के लिए खाली डिब्बों की उपलब्धता न के बराबर हो गई है। इसके कारण निर्यातकों की Vessel Cut-off Miss होने और Shipment Rollover का जोखिम बढ़ गया है।
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अतिरिक्त लागत का बोझ: बंदरगाह के बाहर ट्रकों की लंबी कतारें लगी हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट हॉल्टेज चार्जेस और अतिरिक्त हैंडलिंग लागत लगातार बढ़ रही है।
प्रश्नोत्तरी (FAQ)
Q1: मुंद्रा पोर्ट पर खाली कंटेनर यार्ड ऑपरेटरों की हड़ताल क्यों हुई है?
A: अडानी पोर्ट्स (APSEZ) ने 1 सितंबर से पोर्ट सीमा के बाहर स्थित ऑफ-डॉक डिपो के संचालन पर प्रतिबंध लगाकर खाली कंटेनरों को पोर्ट SEZ के भीतर लाने का निर्देश दिया है। इसी फैसले के विरोध में यार्ड ऑपरेटरों ने 28 अगस्त से सेवाएं रोक दी हैं।
Q2: इस हड़ताल से रोजाना कितने कंटेनर प्रभावित हो रहे हैं?
A: इस व्यवधान के कारण रोजाना लगभग 5,000 खाली कंटेनरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
Q3: निर्यातकों और आयातकों पर इसका सबसे बड़ा वित्तीय असर क्या होगा?
A: वेसल कट-ऑफ मिस होने से शिपमेंट रोलओवर होगा और फ्री-टाइम बीतने के बाद व्यापारियों को भारी Detention & Demurrage Charges तथा अतिरिक्त ट्रकिंग हॉल्टेज फीस का भुगतान करना पड़ेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख व्यापारिक और लॉजिस्टिक्स समाचारों के उपलब्ध आंकड़ों और अपडेट्स पर आधारित है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पक्ष (APSEZ और यार्ड ऑपरेटर) बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। शिपर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी शिपिंग लाइन से अंतिम पुष्टि जरूर कर लें।
