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गाजियाबाद: देवी मंदिर से लौट रहे परिवार पर हमला, 1 गर्भवती महिला समेत 9 घायल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गाजियाबाद । शनिवार, 2 मई 2026

गाजियाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत कैला भट्टा इलाके में शुक्रवार शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई। एक हिंदू परिवार, जो अपनी मन्नत पूरी होने के बाद देवी मंदिर में ‘जात’ (पारंपरिक अनुष्ठान) लगाकर खुशी-खुशी घर लौट रहा था, उस पर अचानक हिंसक हमला कर दिया गया। इस हमले में नौ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, टिंकू सिंह अपने परिवार के साथ मंदिर से लौट रहे थे। जब वे कैला भट्टा में उमर राशन दुकान के पास पहुंचे, तभी फारुख, सलाउद्दीन और उनके करीब 15-20 साथियों ने परिवार को घेर लिया। आरोप है कि हमलावरों ने ईंट-पत्थरों और धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया।

पीड़ित परिवार का कहना है कि न केवल पुरुषों को पीटा गया, बल्कि महिलाओं के साथ भी अभद्रता की गई और उनके कपड़े फाड़ दिए गए। हमले की अचानक हुई इस घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

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पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस उपायुक्त (नगर) धवल जायसवाल ने बताया कि विवाद की शुरुआत सड़क पर चलने को लेकर हुई थी, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया।

  • हिरासत: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया है।

  • उपचार: सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

  • शांति व्यवस्था: इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और वर्तमान में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है।

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धार्मिक आस्था और परंपरा पर प्रहार

यह परिवार ‘जात’ लगाने गया था—यह एक ऐसी परंपरा है जहाँ मन्नत पूरी होने पर बच्चे के बाल कटवाए जाते हैं या विशेष भोग लगाया जाता है। आस्था के इस कार्य से लौटते वक्त हुई हिंसा ने स्थानीय लोगों में रोष पैदा कर दिया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।