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ट्रेड डील से पहले अमेरिका का बड़ा फैसला: 4 भारतीय कंपनियों से हटाए गए रूस से जुड़े प्रतिबंध

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लोकेश मशीन्स और गैलेक्सी बेयरिंग्स पर अमेरिकी प्रतिबंध हटने की 2026 अपडेट इमेज

वाशिंगटन । गुरुवार, 2 जुलाई 2026

भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद और आगामी बड़ी ट्रेड डील (व्यापार समझौते) के आधिकारिक ऐलान से ठीक पहले वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर भारत के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत की उन चार प्रमुख कंपनियों को अपनी ब्लैकलिस्ट से पूरी तरह बाहर कर दिया है, जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को संवेदनशील तकनीक और उपकरण आपूर्ति करने के गंभीर आरोप लगे थे।

अमेरिकी वित्त विभाग (US Department of the Treasury) के अंतर्गत आने वाले ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने अपनी हालिया अपडेटेड स्पेशली डिजिग्नेटेड नेशनल्स एंड ब्लॉक्ड पर्सन्स (SDN) सूची से इन चारों भारतीय कंपनियों के नाम आधिकारिक तौर पर हटा दिए हैं।

प्रतिबंधों की सूची से मुक्त हुईं ये 4 भारतीय कंपनियां

अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा जारी नई सूची के अनुसार, जिन कंपनियों को वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों से बड़ी राहत मिली है, उनके नाम और पते इस प्रकार हैं:

  1. लोकेश मशीन्स लिमिटेड (Lokesh Machines Limited) – हैदराबाद

  2. आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (RRG Engineering Technologies Pvt Ltd) – हैदराबाद

  3. गैलेक्सी बेयरिंग्स लिमिटेड (Galaxy Bearings Limited) – अहमदाबाद

  4. शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (Shaurya Aeronautics Pvt Ltd) – नई दिल्ली

भारतीय कंपनियों पर क्या थे पुराने आरोप?

अक्टूबर 2024 में अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के परिप्रेक्ष्य में लागू एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14024 के तहत करीब 21 भारतीय संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए थे। इनमें से इन प्रमुख चार कंपनियों पर निम्नलिखित आरोप थे:

  • गैलेक्सी बेयरिंग्स लिमिटेड: इस कंपनी पर रोलर बेयरिंग्स और रोलर असेंबली जैसे दोहरे उपयोग (Dual-use) वाले दर्जनों उच्च-प्राथमिकता वाले उपकरण रूसी संस्थाओं को निर्यात करने का आरोप था।

  • शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड: इस एयरोस्पेस कंपनी पर रूस को रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशन सहायता उपकरण और रेडियो रिमोट कंट्रोल सिस्टम भेजने के आरोप लगाए गए थे।

  • आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज: कंपनी पर आरोप था कि उसने अमेरिका की ब्लैकलिस्ट में शामिल रूसी कंपनी ‘आर्टेक्स लिमिटेड’ को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की 100 से अधिक महत्वपूर्ण खेप भेजी थीं।

  • लोकेश मशीन्स लिमिटेड: इस विनिर्माण दिग्गज पर विभिन्न रूसी विनिर्माण इकाइयों को दर्जनों मशीन टूल्स की आपूर्ति करने का आरोप लगा था।

तल्ख रिश्तों और टैरिफ विवाद के बीच इसके क्या हैं मायने?

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक स्तर पर शुल्क (टैरिफ) को लेकर थोड़ी तल्खी चल रही है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगाने के बयानों के बीच दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी एक व्यापक ट्रेड डील को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन कंपनियों का नाम SDN सूची से हटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देश रणनीतिक मतभेदों और आर्थिक हितों को अलग-अलग संभाल रहे हैं।

  • कूटनीतिक संवाद की जीत: प्रतिबंध लगने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने वाशिंगटन के साथ मजबूत पैरवी की थी। भारत ने स्पष्ट किया था कि वह अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण नियमों का कड़ाई से पालन करने वाला एक जिम्मेदार देश है। भारतीय कंपनियों द्वारा अनुपालन (Compliance) के कड़े आश्वासन के बाद ही अमेरिका ने यह यू-टर्न लिया है।

  • कंपनियों को बड़ी वैश्विक राहत: SDN सूची में होने के कारण इन कंपनियों की संपत्ति अमेरिकी क्षेत्राधिकार में फ्रीज हो जाती थी और वे अमेरिकी डॉलर या वैश्विक बैंकिंग प्रणाली का उपयोग नहीं कर पाती थीं। उदाहरण के लिए, लोकेश मशीन्स के ग्राहकों में जॉन डीरे, कमिंस और वोल्वो जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। अब पाबंदियां हटने के बाद ये कंपनियां वैश्विक स्तर पर दोबारा सामान्य रूप से कारोबार कर सकेंगी।

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