मुंबई | बुधवार, 2 सितंबर 2026
भारत ने अपने शताब्दी वर्ष (2047) तक देश की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW (गीगावाट) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी और रणनीतिक खाका तैयार किया है। वर्तमान में भारत की स्थापित परमाणु क्षमता लगभग 8.78 GW है, जिसे वर्ष 2031-32 तक बढ़ाकर 22 GW करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और वर्ष 2070 तक Net-Zero Carbon Emission के वैश्विक संकल्पों को पूरा करने के लिए भारत अब बड़े रिएक्टरों के साथ-साथ नई तकनीकों और निजी क्षेत्र की सहभागिता पर जोर दे रहा है।
100 GW लक्ष्य का विभाजन: किसकी क्या भूमिका होगी?
इस विशाल लक्ष्य को अगले दो दशकों में पूरा करने के लिए सरकार ने त्रिस्तरीय रोडमैप तैयार किया है:
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NPCIL (न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड): कुल क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा यानी 54 GW क्षमता विकसित करेगा।
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संयुक्त उपक्रम (JVs), PSU और निजी कंपनियां: शेष 46 GW क्षमता का निर्माण केंद्रीय व राज्य सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से होगा।
स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर्स (SMRs) पर विशेष जोर
पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों के अलावा, भारत अब Small Modular Reactors (SMRs) को अपनी रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बना रहा है।
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2033 का लक्ष्य: वर्ष 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी SMRs को संचालित (Operationalise) करने की योजना है।
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उपयोगिता: SMRs आकार में छोटे और सुरक्षित होते हैं। इन्हें पुराने कोयला (ताप) विद्युत संयंत्रों के स्थान पर, सीमेंट व स्टील जैसे ऊर्जा-गहन (Energy-intensive) उद्योगों के लिए कैप्टिव पावर प्लांट के रूप में और दूरदराज के क्षेत्रों में आसानी से स्थापित किया जा सकता है।
SHANTI Act, 2025: निजी क्षेत्र के लिए खुले द्वार
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी पूंजी और तकनीक को आकर्षित करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। SHANTI Act, 2025 के लागू होने के बाद से:
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निजी कंपनियों के लिए परमाणु परियोजनाओं में निवेश और निर्माण का रास्ता आसान हुआ है।
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स्वदेशी सप्लाई चेन (Equipments Manufacturing) को मजबूती मिली है।
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अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग और संयुक्त उपक्रमों की गति तेज हुई है।
₹17 लाख करोड़ से अधिक के बड़े निवेश की आवश्यकता
2047 तक 100 GW का आंकड़ा छूने के लिए भारत को अगले 20-22 वर्षों में ₹17 लाख करोड़ से अधिक के पूंजीगत व्यय (CapEx) की आवश्यकता होगी। यह पूंजी निम्नलिखित क्षेत्रों में लगाई जाएगी:
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नए परमाणु रिएक्टरों का निर्माण और भूमि अधिग्रहण।
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निर्बाध परमाणु ईंधन (यूरेनियम/थोरियम) की दीर्घकालिक आपूर्ति।
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अत्याधुनिक ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसमिशन लाइनें।
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घरेलू परमाणु उपकरण निर्माण क्षमता में विस्तार।
निष्कर्ष
2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता का लक्ष्य केवल बिजली उत्पादन का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और जलवायु परिवर्तन से लड़ने का सबसे मजबूत हथियार है। हालांकि, इसे समयबद्ध तरीके से हासिल करने के लिए समय पर पर्यावरणीय स्वीकृतियां, विशाल पूंजी का सुचारू प्रवाह और मजबूत ईंधन आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. भारत का वर्तमान परमाणु ऊर्जा उत्पादन कितना है?
वर्तमान में भारत की कुल स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 8.78 GW है।
Q2. Small Modular Reactors (SMRs) पारंपरिक रिएक्टरों से कैसे अलग हैं?
SMRs आकार में छोटे, निर्माण में कम समय लेने वाले और अधिक सुरक्षित होते हैं। इन्हें स्थापित करने के लिए बड़े भूभाग की आवश्यकता नहीं होती और इन्हें औद्योगिक क्लस्टर्स के पास स्थापित किया जा सकता है।
Q3. SHANTI Act, 2025 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
SHANTI Act, 2025 का मुख्य उद्देश्य भारतीय परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाना, निवेश के नियम सरल बनाना और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी रिपोर्टों, नीतिगत दस्तावेजों और प्रेस विज्ञप्तियों के विश्लेषण पर आधारित है। परमाणु परियोजनाओं से जुड़ी आधिकारिक तिथियां और निवेश आंकड़े नीतिगत निर्णयों के अनुसार परिवर्तनशील हैं।
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