अदन. यमन में जारी एक दशक पुराने गृहयुद्ध ने उस समय एक नया और नाटकीय मोड़ ले लिया, जब शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 को दक्षिणी अलगाववादियों (STC) ने दक्षिण क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्र के 30-अनुच्छेदों वाले संविधान की घोषणा कर दी। इस कदम ने न केवल यमन की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती दी है, बल्कि सऊदी अरब और यूएई के बीच के कूटनीतिक मतभेदों को भी सतह पर ला दिया है।
मुख्य घोषणाएँ और ‘दक्षिण अरब’ का सपना
STC के प्रमुख ऐदारूस अल-जुबैदी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से ‘दक्षिण अरब राज्य’ (State of South Arabia) के निर्माण का आह्वान किया। इस घोषणा की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
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दो वर्षीय संक्रमण काल: अलगाववादियों ने दो साल की संक्रमण अवधि की घोषणा की है, जिसके दौरान वे दक्षिणी क्षेत्रों का प्रशासन संभालेंगे।
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स्वतंत्रता जनमत संग्रह: इस अवधि के अंत में (संभावित तारीख 2 जनवरी, 2028) दक्षिण की स्वतंत्रता के लिए एक जनमत संग्रह (Referendum) कराया जाएगा।
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तात्कालिक प्रभाव की चेतावनी: अल-जुबैदी ने चेतावनी दी कि यदि उनके प्रस्ताव को नहीं माना गया या उनके बलों पर सैन्य हमला हुआ, तो यह संवैधानिक घोषणा तत्काल प्रभावी मानी जाएगी।
बढ़ता तनाव और सैन्य टकराव
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब यमन के तेल समृद्ध क्षेत्र हद्रमौत (Hadramout) में तनाव चरम पर है।
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सऊदी हवाई हमले: रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के युद्धक विमानों ने हद्रमौत में STC के ठिकानों पर हमले किए हैं ताकि उन्हें हाल ही में कब्जाए गए सैन्य कैंपों से पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। इन हमलों में कम से कम 20 लोगों के मारे जाने की खबर है।
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सऊदी-यूएई मतभेद: जहाँ यूएई इन अलगाववादियों का समर्थन कर रहा है, वहीं सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार (PLC) का पक्षधर है। यूएई ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने यमन से अपने सभी सैनिक वापस बुला लिए हैं, जो कूटनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण संकेत है।
ऐतिहासिक संदर्भ: 1990 का विलय
यमन 1990 तक दो अलग देशों—उत्तर यमन और दक्षिण यमन—में विभाजित था। 1967 से 1990 तक दक्षिण यमन एक स्वतंत्र समाजवादी राष्ट्र (PDRY) था। STC का लक्ष्य उसी पुरानी सीमा को बहाल करना और अदन को अपनी राजधानी बनाना है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की राह
सऊदी अरब ने इस स्थिति को संभालने के लिए सभी दक्षिणी गुटों को रियाद में ‘संवाद’ के लिए आमंत्रित किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि इस अलगाववादी घोषणा से हूती विद्रोहियों के खिलाफ चल रही लड़ाई कमजोर पड़ सकती है और यमन में एक नया ‘युद्ध के भीतर युद्ध’ शुरू हो सकता है।
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