कुशीनगर (पडरौना) | शुक्रवार, 3 अप्रैल, 2026
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कुशीनगर जिले के प्रमुख आस्था केंद्र, माँ सायरी मंदिर के समग्र विकास को हरी झंडी दे दी है। पर्यटन विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹74.47 लाख की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस विकास कार्य से न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि कुशीनगर के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर इस मंदिर की चमक भी बढ़ेगी।
जनप्रतिनिधियों की कोशिशें लाईं रंग
माँ सायरी मंदिर के विकास का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित था। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य फुलबदन कुशवाहा ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री जयबीर सिंह से व्यक्तिगत मुलाकात की थी। उनके प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने त्वरित संज्ञान लिया, जिसके बाद पर्यटन विभाग ने इस परियोजना के लिए विस्तृत बजट जारी कर दिया है।
🏗️ क्या है विकास का मास्टरप्लान? (प्रमुख निर्माण कार्य)
पर्यटन विभाग के उप सचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक बनाया जाएगा। मुख्य आकर्षण निम्नलिखित होंगे:
| प्रस्तावित कार्य | विवरण एवं क्षेत्रफल | अनुमानित लागत |
| मल्टीपरपज यात्री हॉल | 153.18 वर्गमीटर (विद्युत व प्लंबिंग सहित) | ₹31.68 लाख |
| शौचालय ब्लॉक | 73.65 वर्गमीटर (आधुनिक सुविधाओं से लैस) | ₹22.65 लाख |
| पाथवे निर्माण | हेक्सागन पावर ब्लॉक इंटरलॉकिंग | परियोजना का हिस्सा |
| सौंदर्यीकरण | RCC बेंच, सोलर लाइट्स और इंटरप्रिटेशन वॉल | परियोजना का हिस्सा |
💰 पहली किस्त जारी: जल निगम को मिली जिम्मेदारी
सरकार ने कार्य में तेजी लाने के लिए कुल बजट में से ₹59 लाख की पहली किस्त तुरंत प्रभाव से जारी कर दी है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इसकी जिम्मेदारी कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (उत्तर प्रदेश जल निगम) को सौंपी गई है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि कार्य तय समय सीमा और निर्धारित मानकों के भीतर पूरा किया जाए।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लगेगा पंख
स्थानीय लोगों में इस घोषणा को लेकर भारी उत्साह है। माँ सायरी मंदिर पडरौना और आसपास के जिलों के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है।
“अब तक सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालुओं को भारी कठिनाई होती थी। मंदिर के सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार से यहाँ धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय दुकानदारों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।” — स्थानीय निवासी
निष्कर्ष: कुशीनगर में ‘विरासत के साथ विकास’
हाल ही में कुशीनगर में स्मार्ट सिटी टाउनशिप और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन 2026 की सफल मेजबानी के बाद, माँ सायरी मंदिर जैसे स्थानीय धार्मिक स्थलों का विकास सरकार की ‘कनेक्टिविटी और संस्कृति’ वाली नीति का हिस्सा है। आने वाले महीनों में यहाँ सोलर लाइट्स और इंटरप्रिटेशन वॉल के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंदिर के गौरवशाली इतिहास की जानकारी भी मिलेगी।
Matribhumisamachar


