मुजफ्फराबाद । शुक्रवार, 3 जुलाई 2026
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों और पाकिस्तानी हुकूमत के बीच टकराव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। क्षेत्र में जारी दमन और मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन के खिलाफ अवामी एक्शन कमेटी (AAC) ने आगामी 5 जुलाई को एक देशव्यापी बड़े विरोध प्रदर्शन का आधिकारिक आह्वान किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पाकिस्तानी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ‘पाकिस्तान रेंजर्स’ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं।
बलूचिस्तान की तर्ज पर ‘इन्फर्स्ड डिसअपीयरेंस’ का खेल
स्थानीय नेताओं और कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां और सेना अब पीओके में भी बलूचिस्तान वाला क्रूर मॉडल अपना रही हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे मुख्य चेहरों और युवाओं को अवैध रूप से हिरासत में लिया जा रहा है और उन्हें ‘जबरन गायब’ (Enforced Disappearances) किया जा रहा है।
तनाव का तात्कालिक कारण अवामी एक्शन कमेटी के वरिष्ठ सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी और उसके बाद उन्हें जबरन गायब किया जाना है। मीर की रिहाई की मांग को लेकर पूरे क्षेत्र में गुस्सा सुलग रहा है, जिसने एक नए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चिंगारी को हवा दे दी है।
रावलकोट बना विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र
गुरुवार देर रात रावलकोट में सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। इस दौरान जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेता और प्रख्यात वकील ख्वाजा मेहरान ने जनसभा को संबोधित करते हुए सीधे पाकिस्तानी हुकूमत को ललकारा। उन्होंने कहा:
“हम पाकिस्तानी अधिकारियों की डराने-धमकाने और अवैध गिरफ्तारियों की राजनीति के आगे झुकने वाले नहीं हैं। हम बिना हथियारों के, पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आखिरी सांस तक अपने हक के लिए लड़ेंगे।”
कश्मीरी महिलाओं पर भी FIR दर्ज
दमन चक्र इस कदर बढ़ चुका है कि पाकिस्तानी पुलिस ने न केवल आंदोलन के आयोजकों और पुरुषों को निशाना बनाया है, बल्कि शांतिपूर्ण रैलियों में शामिल होने वाली कश्मीरी महिलाओं के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कदम जनता में खौफ पैदा करने के लिए उठाया गया है, लेकिन इसका उल्टा असर हो रहा है और महिलाएं अधिक संख्या में सड़कों पर उतर रही हैं।
क्या हैं आंदोलन की बुनियादी वजहें?
हालांकि वर्तमान गुस्सा मानवाधिकारों के हनन और गिरफ्तारियों को लेकर है, लेकिन इस बड़े आंदोलन की बुनियाद पाकिस्तान सरकार की आर्थिक नीतियों में छिपी है। पीओके की जनता लंबे समय से निम्नलिखित मुद्दों को लेकर सड़कों पर है:
-
बिजली के बिलों पर बेतहाशा टैक्स और महंगाई।
-
आटे और बुनियादी खाद्य पदार्थों पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म करना।
-
स्थानीय जल संसाधनों (Hydel Projects) का लाभ स्थानीय लोगों को न देकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को सौंपना।
Matribhumisamachar


