ढेंकनाल. ओडिशा के ढेंकनाल जिले के मोटांगा थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपालपुर गांव के पास शनिवार रात एक पत्थर की खदान में शक्तिशाली विस्फोट के दौरान बड़ा हादसा हो गया। ब्लास्टिंग के कारण चट्टान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिसकी चपेट में आने से कम से कम 2 मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि कुछ अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
घटना का विवरण
अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा शनिवार (3 जनवरी, 2026) की रात करीब 8:30 बजे हुआ। उस समय मजदूर खदान में ड्रिलिंग और पत्थर निकालने के काम में लगे थे। विस्फोट इतना जोरदार था कि ऊपर से भारी पत्थर और मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा नीचे गिर गया, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। अंधेरा होने और हाथियों की आवाजाही के खतरे के कारण रात में बचाव कार्य में बाधा आई, जिसे रविवार सुबह फिर से तेज किया गया।
प्रमुख बिंदु:
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हताहत: अब तक दो शव बरामद किए गए हैं। मृतकों की पहचान बालासोर और क्योंझर/मयूरभंज जिले के निवासियों के रूप में की जा रही है।
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अवैध खनन का आरोप: जिला प्रशासन के अनुसार, इस खदान की लीज अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुकी थी और ब्लास्टिंग की अनुमति भी सितंबर में ही खत्म हो गई थी। इसके बावजूद यहां नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से खनन जारी था।
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राहत एवं बचाव कार्य: ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं। भारी पत्थरों को हटाने के लिए मशीनों और सुराग लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई
ढेंकनाल के जिलाधिकारी आशीष ईश्वर पाटिल और पुलिस अधीक्षक अभिनव सोनकर ने घटनास्थल का दौरा किया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पट्टा समाप्त होने के बाद भी खनन जारी रखने के लिए पट्टाधारक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और खदान को फिलहाल सील कर दिया गया है।
विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी बनी हादसे की वजह
ढेंकनाल के मोटांगा (Motanga) पुलिस सीमा के तहत आने वाली इस खदान में हुई घटना ने एक बार फिर अवैध खनन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक जांच के अनुसार, यहाँ निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं:
अवैध विस्फोटकों का उपयोग:
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि खदान में क्षमता से अधिक और शक्तिशाली विस्फोटकों का उपयोग किया गया था। बिना सुरक्षा विशेषज्ञों की देखरेख में की गई इस ब्लास्टिंग के कारण पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा अस्थिर होकर मजदूरों पर गिर गया।
रात के समय काम पर रोक का उल्लंघन:
नियमों के अनुसार, खदानों में सूर्यास्त के बाद काम करना और ब्लास्टिंग करना प्रतिबंधित है, लेकिन इस मामले में रात 8:30 बजे काम चल रहा था, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
जिला प्रशासन की निगरानी पर सवाल:
चूंकि इस खदान की लीज दिसंबर 2025 में ही समाप्त हो चुकी थी, फिर भी भारी मशीनों और दर्जनों मजदूरों के साथ यहाँ काम जारी था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन की जानकारी प्रशासन को पहले से थी।
प्रशासनिक अपडेट और हेल्पलाइन
जिला प्रशासन ने राहत कार्यों और स्थिति की जानकारी के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि वर्तमान में कोई समर्पित एकल हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने निम्नलिखित विभागों से संपर्क करने के निर्देश दिए हैं:
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जिलाधिकारी कार्यालय (Dhenkanal DM Office): 06762-224505 / 224410
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मोटांगा थाना (Motanga Police Station): स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू और शिनाख्त की जानकारी के लिए यहां संपर्क किया जा सकता है।
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मृतकों की शिनाख्त: प्रशासन ने बालासोर और अन्य जिलों के प्रशासन से संपर्क किया है ताकि मृतकों के परिजनों को सूचित कर शव सौंपे जा सकें।
सरकार की ओर से मुआवजा:
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने मृतकों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि (Ex-gratia) की घोषणा पर विचार करने का संकेत दिया है, साथ ही अवैध खनन में लिप्त कंपनी के मालिक की संपत्ति कुर्क करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
Matribhumisamachar


