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होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘वित्तीय नाकाबंदी’: बीमा कंपनियों के फैसले से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप

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समुद्र में रुके हुए विशाल तेल टैंकरों का दृश्य।

न्यूयॉर्क. फारस की खाड़ी के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों की नींद उड़ा दी है। पिछले 48 घंटों में इस मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों की रफ्तार अचानक थम गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह रुकावट किसी मिसाइल हमले या सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि एक ‘वित्तीय झटके’ के कारण आई है।

इंश्योरेंस कंपनियों का ‘वॉर रिस्क’ सरेंडर

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूरोप और अमेरिका की दिग्गज इंश्योरेंस कंपनियों ने इस क्षेत्र में जहाजों को मिलने वाला ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ कवर अचानक वापस ले लिया है। जिन कंपनियों ने कवर जारी रखा है, उन्होंने प्रीमियम की दरें इतनी बढ़ा दी हैं कि एक सामान्य टैंकर के लिए इस रास्ते से गुजरना अब आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन गया है।

शिपिंग एनालिस्ट्स का कहना है:

“बिना बीमा के कोई भी जहाज मालिक अरबों डॉलर का कच्चा तेल लेकर समुद्र में उतरने का जोखिम नहीं उठाएगा। यह एक तरह की ‘अदृश्य नाकाबंदी’ है जिसने सप्लाई चेन को रातों-रात तोड़ दिया है।”

अनदेखे क्षेत्र (Uncharted Territory) में ऊर्जा बाजार

एनर्जी इकोनॉमिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि वैश्विक ऊर्जा प्रणाली अब एक ऐसे दौर में पहुंच गई है जहां परिणाम अनिश्चित हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल तेल ही नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन के लिए जरूरी कई अन्य चीजें भी गुजरती हैं:

  • कच्चा तेल: वैश्विक आपूर्ति का 20% हिस्सा।

  • LNG और नेचुरल गैस: बिजली उत्पादन के लिए अनिवार्य।

  • उर्वरक (Fertilizers): जिसकी कमी से दुनिया भर में खाद्य संकट पैदा हो सकता है।

  • पेट्रोकेमिकल्स: प्लास्टिक और दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त।

ट्रंप की चुप्पी और वैश्विक चिंता

जहाँ एक ओर तेल की कीमतों में उछाल की आशंका है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस मुद्दे पर चुप्पी ने विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। आमतौर पर तेल कीमतों पर मुखर रहने वाले ट्रंप का अभी तक कोई बड़ा बयान न आना किसी बड़ी ‘जियोपॉलिटिकल रणनीति’ का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या होगा असर?

यदि यह गतिरोध अगले एक हफ्ते तक भी जारी रहता है, तो:

  1. एशियाई और यूरोपीय देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 15-20% की तेजी आ सकती है।

  2. शिपिंग कंपनियां ‘केप ऑफ गुड होप’ (अफ्रीका के नीचे से) का लंबा रास्ता चुनेंगी, जिससे माल ढुलाई का समय 15 दिन बढ़ जाएगा

  3. एलएनजी की कमी से बिजली की दरें बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय: यह संकट इस बात का प्रमाण है कि आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि बीमा और बैंकिंग के दफ्तरों से भी लड़े जा सकते हैं।

matribhumisamachar.com

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