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आगरा: ‘राजेश रेस्टोरेंट’ में पेमेंट करते ही स्क्रीन पर आया ‘अनवर’ का नाम, ताजमहल के पास मचा भारी हंगामा

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आगरा | शनिवार, 4 अप्रैल, 2026

विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के दीदार करने आए पर्यटकों के लिए उस समय स्थिति असहज हो गई, जब पश्चिमी गेट के पास स्थित एक रेस्टोरेंट में ‘नाम’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। भोजन के बाद डिजिटल पेमेंट करते समय सामने आई नाम की विसंगति ने न केवल पर्यटक को चौंका दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, एक पर्यटक अपने परिवार के साथ ताजमहल घूमने आया था। भ्रमण के बाद उन्होंने पश्चिमी गेट स्थित ‘राजेश रेस्टोरेंट’ नामक एक भोजनालय में खाना खाया। विवाद तब शुरू हुआ जब बिल चुकाने के लिए पर्यटक ने क्यूआर (QR) कोड स्कैन किया।

  • बोर्ड पर नाम: राजेश रेस्टोरेंट

  • UPI स्क्रीन पर नाम: अनवर

पेमेंट स्क्रीन पर ‘अनवर’ नाम देखते ही पर्यटक भड़क गया और उसने संचालक पर अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर व्यापार करने का आरोप लगाया। पर्यटक का कहना था कि यह धोखाधड़ी है और इससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जुड़ी हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई शिकायत

मौके पर काफी देर तक गहमागहमी रही। आसपास के दुकानदारों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन पर्यटक ने इस घटना का वीडियो और विवरण सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। पोस्ट वायरल होते ही प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई।

पुलिस जांच और नवीनतम अपडेट (Current Status)

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ताज सुरक्षा, पीयूषकांत राय ने जांच के आदेश दिए। पुलिस की प्रारंभिक जांच में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:

  1. कर्मचारी का खाता: रेस्टोरेंट संचालक का दावा है कि तकनीकी कारणों या सुविधा के लिए उन्होंने डिजिटल भुगतान के लिए अपने एक विश्वसनीय कर्मचारी ‘अनवर’ के बैंक खाते का उपयोग किया था।

  2. लाइसेंस की जांच: पुलिस रेस्टोरेंट के व्यापारिक लाइसेंस और जीएसटी पंजीकरण की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रेस्टोरेंट का वास्तविक मालिक कौन है।

  3. पुलिस का बयान: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जांच में किसी बड़ी साजिश या ‘नाम बदलकर ठगी’ के साक्ष्य नहीं मिले हैं, लेकिन व्यावसायिक पारदर्शिता में कमी पाई गई है।

पर्यटकों के लिए सलाह

आगरा प्रशासन ने इस घटना के बाद व्यापारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रतिष्ठानों और डिजिटल पेमेंट गेटवे पर एक ही नाम रखें ताकि पर्यटकों के मन में किसी प्रकार का भ्रम या असुरक्षा का भाव पैदा न हो।

बड़ी सीख: डिजिटल इंडिया के दौर में क्यूआर कोड और दुकान के बोर्ड के नाम में अंतर होना अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि विश्वास का मुद्दा बन गया है।

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