गुवाहाटी । रविवार, 31 मई 2026
असम की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने राज्य के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक तारीख की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि असम सरकार के मंत्रिपरिषद का विस्तार 5 जून 2026 को किया जाएगा।
हाल ही में संपन्न हुए असम विधानसभा चुनाव 2026 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की प्रचंड जीत के बाद से ही इस बात की चर्चाएं तेज थीं कि कैबिनेट का पूर्ण स्वरूप कब सामने आएगा। अब मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद सभी राजनीतिक कयासों पर विराम लग गया है।
क्यों खास है 5 जून की तारीख?
दरअसल, असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य इस समय एक सांस्कृतिक व धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के साथ मंगोलिया दौरे पर हैं, जहां वे भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी कार्यक्रम में शामिल होने गए हैं। राज्यपाल 3 जून को भारत वापस लौट रहे हैं। उनके आगमन के ठीक दो दिन बाद यानी 5 जून को राजभवन में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।
वर्तमान मंत्रिमंडल की स्थिति
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में असम सरकार के गठन को लेकर मामूली भ्रम था, जिसे स्पष्ट करना जरूरी है। यह असम में एनडीए (NDA) की लगातार तीसरी बार बनी सरकार है, जबकि हिमंता बिस्वा सरमा ने दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में 12 मई 2026 को शपथ ली थी।
12 मई को हुए शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के साथ केवल 4 अन्य मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें:
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रामेश्वर तेली (भाजपा)
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अजंता नियोग (भाजपा)
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अतुल बोरा (असम गण परिषद – AGP)
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चरण बोरो (बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट – BPF)
वर्तमान में 126 सदस्यीय विधानसभा वाले असम में नियम के मुताबिक अधिकतम 18 से 19 मंत्री बनाए जा सकते हैं। चूंकि अभी सिर्फ 4 मंत्री ही कार्यभार संभाल रहे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री के पास कई अहम विभागों का अतिरिक्त बोझ है। 5 जून को होने वाले इस विस्तार के जरिए प्रशासनिक कार्यक्षमता को मजबूत करने के लिए इन विभागों का बंटवारा अन्य मंत्रियों के बीच किया जाएगा।
कैसा रहेगा सीटों का गणित और सामाजिक संतुलन?
2026 के विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन ने 126 में से 101 से अधिक सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जिसमें अकेले भाजपा ने 81-82 सीटें जीती हैं, जबकि सहयोगी दल एजीपी (AGP) और बीपीएफ (BPF) ने 10-10 सीटों पर कब्जा जमाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार में मुख्यमंत्री दिल्ली आलाकमान से चर्चा के बाद क्षेत्रीय संतुलन (जैसे बराक घाटी, ब्रह्मपुत्र घाटी और पहाड़ी क्षेत्र) के साथ-साथ जातीय और सामाजिक समीकरणों को भी साधेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के वरिष्ठ नेता रंजीत कुमार दास को जहां विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के रूप में नामित किया गया है, वहीं कैबिनेट में कई युवा और अनुभवी चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है।
असम के विकास को नई रफ्तार देने और ‘मिशन असम’ को आगे बढ़ाने के लिए 5 जून का यह दिन राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद मील का पत्थर साबित होने वाला है।
Matribhumisamachar


