कोलकाता । गुरुवार, 4 जून 2026
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राजनीतिक पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। यह कानूनी कार्रवाई उनके उस सनसनीखेज भाषण के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने देश के गृह मंत्रालय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पड़ोसी देश बांग्लादेश के एक हाई-प्रोफाइल हत्याकांड का जिक्र कर नए विवाद को हवा दे दी थी।
धर्मतला के धरने से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह पूरा विवाद 2 जून 2026 (मंगलवार) को कोलकाता के धर्मतला इलाके में टीएमसी द्वारा आयोजित एक धरना प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। हालिया चुनावी शिकस्त के बाद मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने बांग्लादेशी छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या का मामला उठाया।
ममता बनर्जी ने खुले मंच से दावा किया, “मुझे बांग्लादेश में हुई इस बड़ी हत्या के पीछे की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों के नामों की जानकारी है। लेकिन मैं इन नामों का खुलासा अभी नहीं करूंगी, क्योंकि इससे पड़ोसी देश में भारी राजनीतिक उथल-पुथल मच सकती है।”
गृह मंत्रालय और अमित शाह पर साधा निशाना
दर्ज एफआईआर के मुताबिक, ममता बनर्जी ने अपने भाषण में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की कार्रवाई का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को भी इस मामले में घसीटा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के एक बड़े शूटर/अपराधी को राज्य की एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था, जो मेघालय के रास्ते अवैध रूप से बंगाल में दाखिल हुआ था।
ममता ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और देश का गृह मंत्रालय भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “मैंने इतने दिनों तक इस संवेदनशील विषय पर कुछ नहीं कहा, लेकिन अब जब अत्याचार अपनी सीमा पार कर चुका है, तो मुझे सच बोलना पड़ रहा है।”
वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने दर्ज कराई FIR; सुरक्षा पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी के इस खुफिया और संवेदनशील दावे के तुरंत बाद सिलीगुड़ी की वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने उनके खिलाफ सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई, जिसे आपराधिक मामले के रूप में दर्ज कर लिया गया है।
शिकायतकर्ता वकील का आरोप है कि ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री पद पर नहीं हैं, ऐसे में एक सार्वजनिक मंच से दो देशों से जुड़ी खुफिया, राजनयिक और बेहद संवेदनशील जानकारियों को इस तरह सार्वजनिक या दावा करने से देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। विदेशी अपराधियों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इन मामलों को राजनीतिक फायदे के लिए उछालना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
बांग्लादेश सरकार ने झाड़ा पल्ला, कहा- ‘चुनावी मौसम का बयान’
ममता बनर्जी की इस टिप्पणी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। बांग्लादेश की सरकार ने इस पूरे बयान से खुद को पूरी तरह अलग (किनारा) कर लिया है।
बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा उबैद ने इस पर आधिकारिक और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
“भारत में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव और वहां के राजनीतिक माहौल के बीच किसी नेता की ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणियों पर आधिकारिक जवाब देना हमारे देश के लिए उचित नहीं है।”
शमा उबैद ने आगे स्पष्ट किया कि शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के संदिग्धों के प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए बांग्लादेश सरकार पश्चिम बंगाल की किसी स्थानीय पार्टी या पूर्व मुख्यमंत्री से नहीं, बल्कि सीधे राजनयिक माध्यमों से भारत की केंद्र सरकार (भारत सरकार) के साथ संपर्क में है।
नवीनतम जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए कुछ हालिया राजनीतिक बदलावों को जानना आवश्यक है, जिसमें अक्सर सोशल मीडिया पर भ्रम देखा जा रहा है:
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वर्तमान राजनीतिक स्थिति: सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में ममता बनर्जी को अभी भी वर्तमान मुख्यमंत्री बताया जा रहा है, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है। मई 2026 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद ममता बनर्जी अब पूर्व मुख्यमंत्री हैं और वर्तमान में राज्य की कमान भाजपा के सुवेंदु अधिकारी संभाल रहे हैं।
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केंद्रीय रुख और डेमोग्राफी कमेटी: यह विवाद ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए फेंसिंग (बाड़ लगाने) के काम में तेजी लाने और ‘कृत्रिम जनसांख्यिकीय बदलावों’ की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है।
इस एफआईआर के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और तेज होने के आसार हैं। टीएमसी जहां इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं कानून के जानकारों का मानना है कि विदेशी मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर दिए गए बयानों के चलते ममता बनर्जी की कानूनी मुश्किलें सच में बढ़ सकती हैं।
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