रुद्रपुर। गुरुवार, 4 जून 2026
उत्तराखंड के सीमांत जनपद ऊधमसिंह नगर में प्रलोभन, डर और दबाव के बल पर कराए जा रहे अवैध मतांतरण (धर्मांतरण) के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस बेहद सख्त रुख में नजर आ रहे हैं। इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए प्रशासन ने अब एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। परिस्थिति के अनुरूप जनपद के हर पांच से सात गांवों पर एक नोडल अधिकारी की तैनाती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में चोरी-छिपे चलाई जा रही संदिग्ध प्रार्थना सभाओं और अवैध गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखना है।
ग्रामीण स्तर पर बनेंगी निगरानी कमेटियां
अपर जिलाधिकारी (ADM) प्रशासन पंकज उपाध्याय ने मामले की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा:
“जिले में मतांतरण एक बड़ी और गंभीर समस्या के रूप में सामने आया है। इसे रोकने के लिए जल्द ही प्रत्येक पांच से सात गांवों के क्लस्टर पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा। यह अधिकारी सीधे तौर पर ग्रामीण स्तर पर स्थानीय लोगों की ‘निगरानी कमेटियां’ (Monitoring Committees) गठित करेगा, ताकि ऐसी किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंच सके।”
इन समाजों को निशाना बनाने का आरोप
प्रशासनिक रिपोर्टों और दर्ज प्राथमिकियों के अनुसार, जिले में सक्रिय कुछ ईसाई मिशनरियों द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से संवेदनशील वर्गों को निशाना बनाया जा रहा था। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित समाजों को प्रलोभन देने या डराने-धमकाने की शिकायतें मिली हैं:
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थारू जनजाति समाज
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बुक्सा जनजाति समाज
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अनुसूचित जाति (SC) वर्ग
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राय सिख समाज
जनता में जागी हिम्मत, दर्ज हुईं कई FIR
लंबे समय तक डर के साए में रहने के बाद, अब पीड़ितों और स्थानीय ग्रामीणों में इस अवैध नेटवर्क के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत दिखाई दे रही है। इस हौसले की शुरुआत नानकमत्ता के नवी नगर से हुई, जहां मतांतरण के सच से पहली बार पर्दा उठा। इसके बाद से शिकायतों का सिलसिला शुरू हो गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, अब तक खटीमा में दो, नानकमत्ता में एक और गदरपुर में भी एक नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी है।
इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए पुलिस और प्रशासन ‘डबल स्ट्राइक’ (दोहरी कार्रवाई) के मूड में हैं। जहां एक ओर पुलिस की SIT (विशेष जांच दल) मामले के कानूनी और वित्तीय स्रोतों की गहराई से जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर एडीएम प्रशासन पंकज उपाध्याय व कौस्तुभ मिश्रा के नेतृत्व में प्रशासनिक टीमें धरातल पर मुस्तैद हैं।
क्या कहता है उत्तराखंड का धार्मिक स्वतंत्रता कानून?
कई बार इस प्रकार के मामलों में अफवाहें भी तेजी से फैलती हैं, इसलिए कानूनी पहलुओं को सही ढंग से समझना आवश्यक है। उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) कानून लागू है। इसके तहत:
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कड़े दंड का प्रावधान: बलपूर्वक, प्रलोभन देकर या धोखाधड़ी से कराए गए धर्मांतरण के मामलों में 3 से 10 वर्ष तक की जेल और ₹50,000 तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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सामूहिक धर्मांतरण पर सख्त एक्शन: यदि मामला सामूहिक धर्मांतरण का है, तो सजा की अवधि और भी अधिक कठोर हो सकती है।
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स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन का नियम: कानूनन, यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे कम से कम एक महीना पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी अनिवार्य है। ऐसा न करने पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन के इस नए ‘नोडल अधिकारी मॉडल’ से उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण अंचलों में सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखा जा सकेगा और जबरन हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों (Demographic changes) पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
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