नई दिल्ली. आरजेडी (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने कथित IRCTC होटल घोटाले में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) की कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी याचिका पर कोई भी तत्काल राहत देने से मना कर दिया है।
मामले की मुख्य बातें:
ट्रायल जारी रहेगा: लालू यादव के वकीलों ने निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों (Charge Framing) को चुनौती देते हुए कार्यवाही पर रोक लगाने की अपील की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि सीबीआई (CBI) का पक्ष सुने बिना इस स्तर पर ट्रायल पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
CBI को नोटिस जारी: हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने जांच एजेंसी से लालू यादव की याचिका पर अपना हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई अब 14 जनवरी, 2026 को होगी। तब तक ट्रायल कोर्ट में मामले की कार्यवाही पूर्ववत जारी रहेगी।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के दो होटलों (पूरी और रांची) के संचालन का ठेका एक निजी कंपनी ‘सुजाता होटल्स’ को देने के बदले में पटना और अन्य स्थानों पर कीमती जमीन रिश्वत के रूप में ली गई थी।
निचली अदालत का रुख
अक्टूबर 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव सहित 14 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश (120B), धोखाधड़ी (420) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। लालू यादव ने इसी आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
मामले के मुख्य कानूनी पहलू
यह पूरा केस भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है:
-
आपराधिक साजिश (धारा 120B): सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव और अन्य आरोपियों ने मिलकर रेलवे की संपत्तियों को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई।
-
धोखाधड़ी (धारा 420): आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करके सुजाता होटल्स को फायदा पहुँचाया गया और रेलवे के साथ धोखाधड़ी की गई।
-
रिश्वत और पद का दुरुपयोग: जांच एजेंसी का दावा है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और बदले में बेनामी संपत्तियां और जमीनें (जैसे पटना का डिलाइट मार्केटिंग प्लॉट) प्राप्त कीं।
अन्य मुख्य आरोपी
इस घोटाले में लालू यादव के अलावा कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं:
-
राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव: लालू यादव की पत्नी और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भी इस साजिश का हिस्सा होने का आरोप है। सीबीआई का कहना है कि रिश्वत में मिली जमीनों के मालिकाना हक वाली कंपनियों में इनकी हिस्सेदारी थी।
-
प्रेम चंद गुप्ता और सरला गुप्ता: पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि ‘डिलाइट मार्केटिंग कंपनी’ (अब लारा प्रोजेक्ट्स) इन्हीं की थी, जिसके जरिए जमीन का लेनदेन हुआ।
-
सुजाता होटल्स के मालिक: विजय कोचर और विनय कोचर, जिन्होंने कथित तौर पर होटलों के रखरखाव का ठेका मिलने के बदले जमीन दी थी।
-
पी.के. गोयल: आईआरसीटीसी (IRCTC) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक (MD), जिन पर टेंडर की शर्तों को निजी कंपनी के पक्ष में मोड़ने का आरोप है।
3. ‘लैंड फॉर जॉब’ केस से भिन्नता
अक्सर लोग इसे ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land for Job) घोटाले के साथ मिला देते हैं, लेकिन यह अलग है:
-
IRCTC घोटाला: यह रेलवे होटलों के टेंडर और उसके बदले जमीन लेने से संबंधित है।
-
लैंड फॉर जॉब: यह रेलवे में चतुर्थ श्रेणी (Group-D) की नौकरी देने के बदले जमीन लेने का मामला है।
Matribhumisamachar


