मुजफ्फराबाद । रविवार, 5 जुलाई, 2026
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK/PoK) में स्थिति बेहद विस्फोटक हो चुकी है। पाकिस्तानी हुकूमत की दमनकारी नीतियों, आर्थिक बदहाली और आटे-बिजली की गंभीर किल्लत के खिलाफ महीनों से चल रहा जन-आंदोलन अब एक खुली बगावत में तब्दील हो गया है। हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 600 से अधिक नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर की गई गिरफ्तारी और प्रमुख आंदोलनकारी नेता शौकत नवाज मीर की नजरबंदी ने इस आग में घी का काम किया है।
इस दमनकारी कार्रवाई से भड़के ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) ने इस्लामाबाद की शहबाज शरीफ सरकार को खुली चुनौती देते हुए सीधे भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
“गुलाम नियंत्रण में हैं, शाह कैद में हैं”
JAAC ने अपने शीर्ष नेतृत्व की मनमानी गिरफ्तारियों पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा, “गुलाम उनके नियंत्रण में हैं। शाह कैद में हैं।” यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि PoK की स्थानीय जनता अब खुद को पाकिस्तानी हुकूमत का गुलाम मानती है और इस बेड़ियों को तोड़ने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
सरदार अमन खान का वीडियो वायरल: पुंछ, राजौरी और कश्मीर से मांगी मदद
JAAC के मुख्य सदस्य सरदार अमन खान का एक बेहद भावुक और आक्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भारी भीड़ को संबोधित करते हुए अमन खान ने नियंत्रण रेखा (LoC) के इस पार (भारतीय क्षेत्र) के लोगों से सीधे अपील की है।
उन्होंने कहा:
“मेंढर, पुंछ, राजौरी, डोडा के लोगों से… हम वहां के लोगों से अपील करते हैं। इस तरफ राशन की कमी है, दवाओं की कमी है, और हमें आपकी मदद की जरूरत है। हमें आपकी मदद चाहिए।”
यह बयान साफ तौर पर उजागर करता है कि पाकिस्तानी शासन के तहत इस क्षेत्र में कितना गंभीर मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) पैदा हो चुका है। लोग बुनियादी भोजन और चिकित्सा सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
“हम खत्म करना चाहते हैं सीजफायर लाइन”
पाकिस्तानी नियंत्रण से बाहर निकलने की स्थानीय लोगों की बेताबी उस समय खुलकर सामने आ गई जब अमन खान ने दोनों कश्मीरों को बांटने वाली कृत्रिम सीमाओं को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। उन्होंने विभाजन के पार संदेश भेजते हुए कहा कि वे अब इस ‘सीजफायर लाइन’ (LoC) को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें भारतीय हिस्से के कश्मीरी भाइयों के समर्थन की आवश्यकता है।
पाकिस्तानी हुकूमत की धमकियों को खारिज करते हुए उन्होंने जोश से भरी भीड़ से कहा, “अगर किसी को लगता है कि हमारी कमजोरी देखकर हम कहीं फंस गए हैं, तो वे गलतफहमी में हैं। खुदा ने चाहा तो हम आपको रास्ते दिखाएंगे कि रास्ते कहां हैं।”
LoC की तरफ मार्च करने की तैयारी
एक अन्य वीडियो में सुरक्षा व्यवस्था को सीधे चुनौती देते हुए खान ने प्रदर्शनकारियों की गूंजती भीड़ से पूछा, “क्या हमें सीजफायर लाइन (LoC) की तरफ बढ़ना चाहिए या नहीं? जोर से बताओ, क्या हमें आगे बढ़ना चाहिए या नहीं?” जिस पर हजारों की भीड़ ने एक सुर में चिल्लाकर जवाब दिया, “हां!”
पाकिस्तानी सेना को सीधी चेतावनी: “हमारे पास भी विकल्प हैं”
शांतिपूर्ण नागरिक विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस की हिंसक कार्रवाई को लेकर JAAC ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार प्रायोजित अत्याचार नहीं रुके, तो इसका अंजाम गंभीर होगा। खान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा:
“इसीलिए हम उनसे कहते हैं कि कश्मीरी जज्बे और राजनीतिक रुख के जवाब में अगर गोलियां चलाई गईं, तो हमारे पास भी विकल्प हैं। कल शिकायत मत करना, कल पछतावा मत करना कि आपको बुरा लगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि पाकिस्तान वफादारी दिखाएगा तो वफादारी मिलेगी, लेकिन यदि वह क्रूरता पर उतारू है, तो वहां के लोग भी इंसान हैं और वे उसी भाषा में जवाब देना जानते हैं।
पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को एक करने की गूंज
अपने संबोधनों में आंदोलनकारी नेताओं ने केवल PoK ही नहीं, बल्कि गिलगित-बाल्टिस्तान, श्रीनगर, बारामूला, जम्मू, लद्दाख और करगिल तक के लोगों को जोड़ते हुए बात की। यह दिखाता है कि इस आंदोलन का दायरा अब केवल स्थानीय सब्सिडी की मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव और आत्मनिर्णय के आंदोलन का रूप ले चुका है।
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