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यमुना नदी में अवैध रेत खनन पर NGT का बड़ा एक्शन: दिल्ली और UP के 7 शीर्ष अधिकारियों को बनाया प्रतिवादी, जवाब तलब

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यमुना नदी के बीचों-बीच रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। नदी के तल से रेत निकालने के लिए दो भारी पोकलेन मशीनें और एक जेसीबी तैनात है।
नई दिल्ली । बुधवार, 12 अगस्त 2026
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने यमुना नदी में अवैध रेत खनन और दिल्ली-गाजियाबाद के बीच नदी का प्राकृतिक प्रवाह रोककर सड़क बनाए जाने के संवेदनशील मामले पर कड़ा कदम उठाया है। अधिकरण ने अंतर-राज्यीय सीमा पर प्रशासनिक ढिलाई को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 7 वरिष्ठ अधिकारियों को मामले में प्रतिवादी (Respondents 11 to 17) के रूप में शामिल किया है और उनसे जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2024 में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि भू-माफियाओं ने रेत के अनधिकृत परिवहन के लिए दिल्ली और गाजियाबाद के बीच यमुना नदी के बीचों-बीच एक कच्ची सड़क का निर्माण कर लिया था। NGT ने इस रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई शुरू की थी।
पूर्व में मई 2026 में इस मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इन अधिकारियों को बनाया गया प्रतिवादी

प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए NGT की पीठ (न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल और डॉ. अफ़रोज़ अहमद) ने निम्नलिखित अधिकारियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है:
  1. जिलाधिकारी, बागपत
  2. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), बागपत
  3. जिलाधिकारी, गौतम बुद्ध नगर
  4. पुलिस आयुक्त, गौतम बुद्ध नगर
  5. पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद
  6. पुलिस आयुक्त, दिल्ली
  7. जिलाधिकारी, आउटर नॉर्थ जिला, दिल्ली
इन सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई (15 सितंबर 2026) से कम से कम एक दिन पहले अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा।

किन बिंदुओं पर NGT ने मांगी है स्पष्टता?

अधिकरण ने माना कि सीमावर्ती क्षेत्रों में खनन रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित संयुक्त कार्यबल (Joint Task Force) की बैठकों, नियमित गश्त (Joint Patrolling) और पुलिस कार्रवाई के विवरण अब तक पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
मुख्य बिंदु NGT का निर्देश / चिंता
प्रशासनिक दायरा अंतर-राज्यीय सीमा होने के कारण उठने वाले जिम्मेदारी के सवालों का स्थायी समाधान।
संयुक्त कार्यबल टास्क फोर्स की त्रैमासिक बैठकों और पुलिस गश्त का पारदर्शी रिकॉर्ड।
पर्यावरणीय क्षति नदी के जलीय पारिस्थितिकी (Aquatic Ecology) और भूजल स्तर की सुरक्षा।

पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव

यमुना नदी के प्रवाह को रोककर बनाई गई सड़कें न केवल कानूनी नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि इससे नदी की प्राकृतिक संरचना नष्ट होती है। अवैध खनन से:
  • नदी तटों का कटाव और अस्थिरता बढ़ती है।
  • जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होता है।
  • भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की क्षमता घटती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: NGT ने किस खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था?
Ans: NGT ने नवंबर 2024 में प्रकाशित उस मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था जिसमें दिल्ली और गाजियाबाद के बीच यमुना में रेत खनन के लिए नदी के प्रवाह को रोककर सड़क बनाने का खुलासा हुआ था।
Q2: मामले की अगली सुनवाई कब है?
Ans: इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण और जवाबों की समीक्षा के लिए NGT ने अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 तय की है।
Q3: अधिकारियों को प्रतिवादी बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Ans: दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमाओं के बीच प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को लेकर बनने वाले संशय को समाप्त करना और खनन माफिया के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करना।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक समाचार रिपोर्ट्स और अधिकरण के आदेशों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल पर्यावरण एवं कानूनी जागरूकता फैलाना है।
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