तेहरान. मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अपने सबसे खतरनाक चरण में पहुँच गया है। आज युद्ध के छठे दिन, इजरायली और अमेरिकी वायु सेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और सनंदाज सहित कई रणनीतिक शहरों पर “दसवीं लहर” के तहत विनाशकारी हवाई हमले किए। इन हमलों में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
समुद्र में पलटवार: जल उठा अमेरिकी तेल टैंकर
ईरानी नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए फारस की खाड़ी में एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। IRGC ने दावा किया है कि उन्होंने एक अमेरिकी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला किया, जिससे टैंकर में भीषण आग लग गई।
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यह हमला अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने के ठीक बाद हुआ है।
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ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके शहरों पर बमबारी नहीं रुकी, तो वह खाड़ी क्षेत्र के अन्य “शत्रु देशों” के ठिकानों को भी निशाना बनाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: “मुजतबा खामेनेई स्वीकार्य नहीं”
युद्ध के बीच कूटनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का संकेत दिया है। एक विशेष इंटरव्यू में ट्रंप ने दिवंगत अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को एक “लाइटवेट” नेता करार देते हुए उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में पूरी तरह खारिज कर दिया।
“हमें एक ऐसा नेता चाहिए जो ईरान में शांति और स्थिरता ला सके। यदि खामेनेई की पुरानी कट्टरपंथी नीतियों को ही दोहराया गया, तो अमेरिका अगले पांच वर्षों तक युद्ध विराम नहीं करेगा।” — डोनाल्ड ट्रंप
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता संकट
युद्ध का सबसे भयावह असर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में देखने को मिल रहा है। दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर जहाजों की आवाजाही 80% तक गिर गई है।
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हूती और हिजबुल्लाह: यमन के हूती विद्रोहियों और लेबनान के हिजबुल्लाह ने युद्ध में पूरी तरह शामिल होने की घोषणा की है, जिससे इजरायल के उत्तरी मोर्चे पर भी खतरा बढ़ गया है।
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निकासी अभियान: भारत, चीन और यूरोपीय देशों ने अपने नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से निकालने के लिए आपातकालीन मिशन शुरू कर दिए हैं।
युद्ध की पृष्ठभूमि
यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने एक संयुक्त सर्जिकल स्ट्राइक में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को निशाना बनाया था। उनकी मौत के बाद से ईरान एक तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद के नेतृत्व में युद्ध लड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले 48 घंटों में संघर्ष विराम (Ceasefire) पर कोई सहमति नहीं बनी, तो यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध की आहट साबित हो सकता है।
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