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RSS के गीतों से संस्कार: कानपुर के दामोदर नगर में स्वयंसेवकों ने सुरों से जगाई देशभक्ति की अलख

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कानपुर | रविवार, 29 मार्च 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गीतों की शक्ति केवल सुरों में नहीं, बल्कि उनमें छिपे राष्ट्रभक्ति के गहरे संस्कारों में है। कानपुर के सरस्वती विद्या मंदिर, दामोदर नगर में आयोजित ‘गीतांजलि’ कार्यक्रम के दौरान यह भावना जीवंत हो उठी। इस अवसर पर विभाग संघ चालक श्याम बाबू गुप्त ने कहा कि संघ की स्थापना के समय से ही देशभक्ति गीतों का समावेश शाखाओं में किया गया था, जो आज भी स्वयंसेवकों को नई प्रेरणा और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

गीत नहीं, ये हैं जीवन के संस्कार

उद्घाटन भाषण के दौरान श्याम बाबू गुप्त ने गीतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“गीत लिखने वालों को भले ही दुनिया न जानती हो, लेकिन उनके शब्दों के भाव स्वयंसेवकों के भीतर लंबे समय तक संस्कारों का बीजारोपण करते हैं। ये गीत हमें अपनी जड़ों और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों की याद दिलाते हैं।”

5 साल के बालकों से लेकर 70 साल के बुजुर्गों तक का संगम

पिछले 8 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस ‘गीतांजलि’ कार्यक्रम की सबसे खास बात इसकी विविधता रही। इस वर्ष:

  • कुल प्रतिभागी: 156 स्वयंसेवक।

  • आयु वर्ग: 5 वर्ष के नन्हे स्वयंसेवकों से लेकर 70 वर्ष के बुजुर्गों ने अपनी सुरीली और ओजस्वी आवाज से समां बांध दिया।

  • प्रतिनिधित्व: कानपुर दक्षिण भाग के कुल 13 नगरों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

विजेताओं की घोषणा: कौन रहा अव्वल?

प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा भाग संघ चालक राधेश्याम जी द्वारा की गई। विजेताओं की सूची इस प्रकार है:

एकल गीत प्रतियोगिता:

  • प्रथम स्थान: वरुण एवं श्याम सुन्दर (छत्रसाल नगर)

  • द्वितीय स्थान: सत्येन्द्र (प्रताप नगर)

  • तृतीय स्थान: आयुष (सावरकर नगर)

गणगीत (समूह गान) प्रतियोगिता:

  • प्रथम: माधव नगर

  • द्वितीय: छत्रसाल नगर

देशभक्ति के गीतों से गुंजायमान हुआ वातावरण

कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने ‘हिन्दू जगेगा विश्व जगेगा’, ‘कर रहे हम साधना’, ‘संघ किरण घर-घर’, और ‘चन्दन है इस देश की माटी’ जैसे सुप्रसिद्ध संघ गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इन गीतों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर कर दिया।

उपस्थिति: इस गरिमामय कार्यक्रम का संचालन सुधीर जी और बौद्धिक प्रमुख देवेश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में आशीष प्रताप सिंह, प्रवीण पाण्डे, भाग प्रचारक यशजी और सेवा प्रमुख विश्वजीत सहित संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।