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उत्तराखंड: रुड़की में ‘तीन तलाक’ पर बड़ी कार्रवाई, पति पर अब UCC की धाराओं में भी कसेगा शिकंजा

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उत्तराखंड UCC कानूनी दस्तावेज का सांकेतिक चित्र।

देहरादून | सोमवार, 6 अप्रैल, 2026

उत्तराखंड के रुड़की से महिला उत्पीड़न और तीन तलाक का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद अब पुलिस इस मामले में नए कानूनों के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है, जिससे आरोपी की मुश्किलें बढ़ना तय है।

क्या है पूरा मामला?

हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंदरजूड गांव की रहने वाली शाहीन का निकाह करीब ढाई साल पहले मोहम्मद दानिश के साथ हुआ था। पीड़िता का आरोप है कि निकाह के कुछ समय बाद से ही उसे ससुराल में मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।

शाहीन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसके पति और ससुराल पक्ष के लोग लगातार छोटी-छोटी बातों पर उसके साथ मारपीट करते थे। विवाद इतना बढ़ा कि दानिश ने पीड़िता को एक साथ ‘तीन तलाक’ बोलकर घर से बाहर निकाल दिया और दोबारा वापस आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

UCC की धाराओं ने बढ़ाया केस का वजन

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब पुलिस ने सामान्य धाराओं के साथ-साथ समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ी धाराओं को भी प्राथमिकी (FIR) में शामिल करने का निर्णय लिया।

  • समान अधिकार: उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहाँ UCC प्रभावी है। इसके तहत विवाह और तलाक के नियम सभी नागरिकों के लिए समान हैं।

  • कठोर दंड: तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पहले से ही अवैध है, लेकिन UCC के प्रावधानों के जुड़ने से अब पीड़िता को गुजारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी और संपत्ति में अधिकार मिलने की प्रक्रिया और अधिक सशक्त हो गई है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए बुग्गावाला थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। थाना प्रभारी का कहना है कि:

“पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। चूंकि उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, इसलिए कानूनी विशेषज्ञों की राय लेकर संबंधित नई धाराएं भी जोड़ी जा रही हैं। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।”

कानूनी पहलू: क्यों फंसेगा आरोपी?

भारत में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत ‘तीन तलाक’ देना एक संज्ञेय अपराध है। इसमें निम्नलिखित प्रावधान हैं:

  1. 3 वर्ष तक की जेल: आरोपी पति को तीन साल तक की कैद हो सकती है।

  2. जुर्माना: न्यायालय द्वारा भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

  3. गैर-जमानती: यह एक गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है (मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई के बाद ही जमानत संभव है)।

सामाजिक प्रभाव

रुड़की का यह मामला उत्तराखंड में UCC के क्रियान्वयन की दिशा में एक ‘टेस्ट केस’ के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और महिला संगठनों ने पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन किया है। यह मामला स्पष्ट संदेश देता है कि अब किसी भी व्यक्तिगत कानून की आड़ में महिलाओं का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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