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एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग पर लगाम: अब पैकिंग पर नीली पट्टी से होगी पहचान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली.

केंद्र सरकार ने देश में एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने और ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक नया प्रशासनिक कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्ज रूल्स, 1945 के नियम 95 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की पैकिंग पर बाईं ओर एक स्पष्ट नीली पट्टी (Blue Vertical Strip) अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है।
ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) और ड्रग कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) की सिफारिशों के आधार पर लाया गया यह बदलाव आम लोगों और फार्मासिस्टों को बिना पर्चे मिलने वाली ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री से रोकने में मदद करेगा।
नए नियम की मुख्य विशेषताएं
  • नीली पट्टी (Blue Strip): पैकेजिंग के बाईं तरफ एक नीली वर्टिकल पट्टी दी जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि दवा एक एंटीबायोटिक या एंटीमाइक्रोबियल है।
  • रेड लाइन का विस्तार: पहले से लागू ‘रेड लाइन’ चेतावनी के साथ यह नीली पट्टी दवा की श्रेणी को तुरंत पहचानने में मदद करेगी।
  • शेड्यूल H और H1 चेतावनियां: दवाओं के पैकेट पर बड़े अक्षरों में श्रेणी के अनुसार चेतावनी और “केवल पंजीकृत डॉक्टर के पर्चे पर बिक्री” अंकित रहेगा।
  • सुरक्षित फॉर्मूले: गैर-जरूरी ‘फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन’ (FDC) वाली दवाओं पर भी कड़े प्रतिबंध जारी रहेंगे।
एंटीबायोटिक दवाओं की प्रमुख श्रेणियां और उपयोग
  • Penicillins (Amoxicillin, Ampicillin): गले के इन्फेक्शन, टाइफाइड और दांतों के दर्द में उपयोग।
  • Cephalosporins (Cefixime, Ceftriaxone): यूरिन इन्फेक्शन (UTI) और फेफड़ों के संक्रमण में इस्तेमाल।
  • Macrolides (Azithromycin, Erythromycin): निमोनिया, साइनस और गले की खराश के लिए।
  • Fluoroquinolones (Ofloxacin, Ciprofloxacin): पेट के इन्फेक्शन और दस्त में इस्तेमाल।
  • Tetracyclines (Doxycycline): त्वचा रोगों (मुंहासे) और बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए।
मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां
  • खुद दवा न लें: सामान्य सर्दी, जुकाम या फ्लू जैसे वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं, इसलिए स्व-उपचार (Self-medication) से बचें।
  • दवा का कोर्स पूरा करें: डॉक्टर द्वारा बताई गई अवधि तक दवा का सेवन करें। बेहतर महसूस होने पर भी इलाज अधूरा छोड़ने से बैक्टीरिया दवा-प्रतिरोधी (Superbugs) बन जाते हैं।
  • पैकिंग जांचें: दवा खरीदते समय नीली या लाल पट्टी और पर्चे की अनिवार्यता वाले निशान जरूर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. दवाओं पर नीली पट्टी का क्या अर्थ है?
यह पट्टी दर्शाती है कि दवा एक एंटीमाइक्रोबियल या एंटीबायोटिक है, जिसे केवल डॉक्टर की सलाह और पर्चे पर ही लिया जाना चाहिए।
Q2. एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) क्या है?
जब बैक्टीरिया या अन्य रोगाणु दवाओं के बार-बार या गलत इस्तेमाल से उनके प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं और दवाएं असर करना बंद कर देती हैं, तो इसे AMR कहते हैं।
Q3. क्या वायरल बुखार में एंटीबायोटिक ली जा सकती है?
नहीं, एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरियल इन्फेक्शन को ठीक करने के लिए होती हैं; वे वायरस पर काम नहीं करतीं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह सामग्री केवल सूचनात्मक और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए हमेशा किसी योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श लें। स्व-चिकित्सा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।