कानपुर. शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण शहीद मेजर सलमान खान बस अड्डे (झकरकटी) को शिफ्ट करने की योजना एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। झकरकटी बस अड्डे पर दबाव कम करने के लिए इसे नौबस्ता या अन्य प्रस्तावित स्थानों पर शिफ्ट किया जाना था, लेकिन एलिवेटेड रोड के रैंप निर्माण की तकनीकी बाधाओं ने पूरी प्रक्रिया को लटका दिया है।
रैंप निर्माण बना मुख्य बाधा
योजना के मुताबिक, झकरकटी बस अड्डे के पास से गुजरने वाली एलिवेटेड रोड के रैंप का निर्माण होना है। इस रैंप के डिजाइन और एलाइनमेंट को लेकर परिवहन विभाग और निर्माणदायी संस्थाओं के बीच अभी तक पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। जब तक रैंप का निर्माण स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक बस अड्डे के प्रवेश और निकास द्वार की स्थिति तय करना मुश्किल हो रहा है।
यात्रियों और परिवहन विभाग की बढ़ी मुश्किलें
बस अड्डे की शिफ्टिंग में हो रही देरी का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है:
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जाम की समस्या: झकरकटी के आसपास दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी होती है।
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सुविधाओं का अभाव: शिफ्टिंग की अनिश्चितता के कारण वर्तमान बस अड्डे पर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और मरम्मत का काम भी प्रभावित हो रहा है।
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प्रस्तावित योजनाएं ठप: नौबस्ता में नए टर्मिनल के निर्माण और वहां से बसों के संचालन की फाइलें फिलहाल धूल फांक रही हैं।
अधिकारियों का पक्ष
परिवहन निगम के सूत्रों का कहना है कि एलिवेटेड रोड के रैंप का काम पूरा होना बस अड्डे के भविष्य के लिए अनिवार्य है। यदि बिना रैंप के समन्वय के शिफ्टिंग की गई, तो भविष्य में बसों के आवागमन में और भी अधिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। शासन स्तर पर इस मामले में रिपोर्ट भेजी गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
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