मुंबई. महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद सत्ता समीकरणों ने सभी को चौंका दिया है। सत्ता की खातिर वैचारिक धुर विरोधियों—कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM—के साथ भाजपा के स्थानीय नेताओं द्वारा हाथ मिलाए जाने पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस “बेमेल” गठबंधन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त नाराजगी जताते हुए इसे ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है।
अंबरनाथ: शिवसेना को रोकने के लिए कांग्रेस से मिलाया हाथ
ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए अपने धुर विरोधी कांग्रेस और अजित पवार गुट (NCP) के साथ गठबंधन कर लिया।
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समीकरण: ६० सदस्यीय परिषद में शिवसेना २७ सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन बहुमत (३१) से दूर थी।
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गठबंधन: भाजपा (१४ सीटें), कांग्रेस (१२ सीटें) और NCP (४ सीटें) ने मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ बनाई।
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नतीजा: इस गठबंधन ने बहुमत हासिल कर भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटील को नगर परिषद अध्यक्ष चुन लिया।
अकोट: ‘अकोट विकास मंच’ में AIMIM की एंट्री
अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भी ऐसा ही चौंकाने वाला गठबंधन देखने को मिला। यहाँ भाजपा ने AIMIM के पार्षदों के साथ मिलकर ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया।
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यहाँ भाजपा ने AIMIM, शिवसेना (उद्धव और शिंदे दोनों गुट), और NCP (शरद और अजित दोनों गुट) को साथ लेकर एक सर्वदलीय गठबंधन बनाया।
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भाजपा की माया धुले को यहाँ अध्यक्ष चुना गया।
मुख्यमंत्री फडणवीस का कड़ा रुख: “यह अनुशासनहीनता है”
इस घटनाक्रम पर नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि पार्टी नेतृत्व ने ऐसे किसी भी गठबंधन की अनुमति नहीं दी थी।
“भाजपा कभी भी कांग्रेस या AIMIM के साथ गठबंधन नहीं कर सकती। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। जिन स्थानीय नेताओं ने अपनी मर्जी से यह फैसला लिया है, उन्होंने पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया है। मैंने इन गठबंधनों को तुरंत तोड़ने और संबंधित नेताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।”
— देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र
सियासी प्रतिक्रियाएं
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विपक्ष का हमला: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भाजपा को “दोहरे चरित्र” वाली पार्टी बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “कांग्रेस मुक्त भारत” का नारा देने वाली भाजपा सत्ता के लिए अब कांग्रेस और AIMIM की गोद में बैठ गई है।
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सहयोगियों की नाराजगी: शिंदे गुट के नेताओं ने इसे ‘गठबंधन धर्म’ का उल्लंघन बताया है, खासकर अंबरनाथ में जहाँ भाजपा ने अपने ही मुख्य गठबंधन सहयोगी (शिवसेना) को दरकिनार किया।
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