भारतीय इतिहास और सिनेमा में कुछ कहानियाँ ऐसी हैं, जो बार-बार दोहराए जाने के कारण सच जैसी लगने लगती हैं। अनारकली की प्रेमकथा भी उन्हीं में से एक है। मुगल-ए-आजम जैसी कालजयी फिल्म ने अनारकली को भारतीय सांस्कृतिक चेतना में इस कदर बसा दिया कि बहुत से लोग उसे ऐतिहासिक पात्र मानने लगे। लेकिन क्या इतिहास भी इसकी पुष्टि करता है?
अनारकली और शहज़ादा सलीम की प्रेमकथा
लोककथाओं के अनुसार, अनारकली मुगल दरबार की एक बेहद खूबसूरत कनीज थी, जिससे शहज़ादा सलीम (आगे चलकर जहांगीर) प्रेम करने लगे। कहा जाता है कि जब यह बात सम्राट अकबर तक पहुँची, तो उन्होंने इसे राजवंश की प्रतिष्ठा के खिलाफ मानते हुए अनारकली को कठोर दंड दिया।
लेकिन यह कहानी जितनी भावुक है, उतनी ही विवादित भी।
1️⃣ समकालीन इतिहासकारों की चुप्पी
अकबर के शासनकाल में इतिहास लेखन को अत्यंत महत्व दिया जाता था। उस दौर के दो प्रमुख इतिहासकार थे—
- अबुल फ़ज़ल (अकबरनामा के लेखक)
- अब्दुल क़ादिर बदायूंनी
इन दोनों ने मुगल दरबार की राजनीति, षड्यंत्रों और निजी विवादों तक का उल्लेख किया है। इसके बावजूद,
👉 अनारकली नाम की किसी महिला या उसे दीवार में चुनवाने जैसी घटना का किसी भी आधिकारिक मुगल दस्तावेज़ में उल्लेख नहीं मिलता।
इतिहासकारों की यह खामोशी इस कथा की ऐतिहासिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
2️⃣ अनारकली का ज़िक्र आखिर आया कहाँ से?
दिलचस्प बात यह है कि अनारकली का पहला उल्लेख किसी भारतीय ग्रंथ में नहीं, बल्कि यूरोपीय यात्रियों के संस्मरणों में मिलता है।
- विलियम फिंच (1608–1611): उन्होंने लाहौर में सुनी एक कहानी का उल्लेख किया, जिसमें अनारकली और सलीम के प्रेम संबंधों का ज़िक्र था।
- एडवर्ड टेरी ने भी इसी तरह की बातें लिखीं।
🔍 महत्वपूर्ण तथ्य: ये यात्री अकबर की मृत्यु के बाद भारत आए थे। यानी उन्होंने जो लिखा, वह प्रत्यक्ष अनुभव नहीं, बल्कि उस समय प्रचलित लोककथाएँ थीं।
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3️⃣ लाहौर का मकबरा: सबूत या भ्रम?
पाकिस्तान के लाहौर में स्थित एक मकबरा आज भी “अनारकली का मकबरा” कहलाता है।
- मकबरे पर खुदा एक फारसी शेर, जिसे सलीम (जहांगीर) से जोड़ा जाता है, इस कथा को और रहस्यमय बना देता है।
- हालांकि कई इतिहासकार मानते हैं कि यह मकबरा अनारकली का नहीं, बल्कि जहांगीर की किसी बेगम—जैसे साहिब-ए-जमाल—का हो सकता है।
- “अनारकली” संभवतः कोई वास्तविक नाम नहीं, बल्कि एक उपाधि (खिताब) रही हो।
4️⃣ नाटक और फिल्मों ने कैसे बनाया इतिहास?
अनारकली को जनमानस में अमर बनाने का श्रेय जाता है उर्दू नाटककार इम्तियाज़ अली ताज को, जिन्होंने 1922 में नाटक अनारकली लिखा।
इसके बाद के. आसिफ द्वारा निर्देशित मुगल-ए-आजम ने इस कहानी को भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा प्रेम-महाकाव्य बना दिया।
📽️ नाटक और सिनेमा ने एक लोककथा को इतना प्रभावशाली रूप दिया कि वह लोगों की नजरों में इतिहास बन गई।
🔚 इतिहास नहीं, बल्कि मोहब्बत का मिथक
ठोस ऐतिहासिक प्रमाणों के अभाव में अनारकली को एक काल्पनिक पात्र या लोककथा मानना अधिक तार्किक प्रतीत होता है। मुगल काल की सख्त प्रशासनिक व्यवस्था और विस्तृत दस्तावेज़ी परंपरा को देखते हुए, इतनी बड़ी घटना का इतिहास से पूरी तरह गायब होना लगभग असंभव लगता है।
👉 इसलिए अनारकली की कहानी इतिहास से अधिक मोहब्बत, कल्पना और लोकविश्वास का मिथक है—एक ऐसा अफसाना, जो सच न होते हुए भी सदियों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है।
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