मुंबई. अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा और उनके पिता हरभजन सिंह कुंडलेस के लिए बड़ी राहत। मुंबई की एक विशेष अदालत ने बहुचर्चित ‘फर्जी जाति प्रमाण पत्र’ मामले में दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद साल 2014 में शुरू हुआ था जब नवनीत राणा ने अमरावती लोकसभा सीट (जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है) से चुनाव लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र जमा किया था। उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने ‘सिख चमार’ होने का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की है ताकि वे आरक्षित सीट से चुनाव लड़ सकें।
इस मामले में मुंबई के शिवड़ी कोर्ट में मुकदमा चल रहा था। उन पर धोखाधड़ी और साजिश रचने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अदालत का फैसला
विशेष कोर्ट ने सबूतों के अभाव और कानूनी तर्कों को सुनने के बाद फैसला सुनाया कि नवनीत राणा और उनके पिता के खिलाफ लगे आरोप साबित नहीं हो सके। कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त करते हुए मामले को समाप्त कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी राहत
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें उनके जाति प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनके प्रमाण पत्र को वैध माना था, जिसके बाद आज ट्रायल कोर्ट ने भी उन्हें आपराधिक आरोपों से मुक्त कर दिया है।
नवनीत राणा की प्रतिक्रिया
बरी होने के बाद नवनीत राणा के समर्थकों में खुशी की लहर है। इस फैसले को उनकी एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस विवाद के कारण लंबे समय तक उनकी सदस्यता और राजनीतिक भविष्य पर तलवार लटकी हुई थी।
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