वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश की सैन्य शक्ति को एक नए स्तर पर ले जाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के माध्यम से जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2027 के लिए अमेरिका का सैन्य बजट 1.5 ट्रिलियन डॉलर ($1,500 अरब) होना चाहिए। यह प्रस्ताव वर्तमान बजट की तुलना में लगभग 50% की भारी बढ़ोतरी को दर्शाता है।
प्रमुख बिंदु:
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‘ड्रीम मिलिट्री’ का निर्माण: ट्रंप ने कहा कि इस ऐतिहासिक बजट वृद्धि का उद्देश्य एक ऐसी “ड्रीम मिलिट्री” (सपनों की सेना) तैयार करना है, जो किसी भी दुश्मन का सामना करने और अमेरिका को पूरी तरह सुरक्षित रखने में सक्षम हो।
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टैरिफ से होगी फंडिंग: राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि बजट में इस भारी इजाफे का आधार अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) से होने वाली रिकॉर्ड कमाई है। उन्होंने दावा किया कि टैरिफ से मिल रहे राजस्व के कारण अब अमेरिका न केवल अपना कर्ज कम कर सकता है, बल्कि सेना पर इतना बड़ा निवेश भी कर सकता है।
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रक्षा कंपनियों को चेतावनी: बजट की घोषणा के साथ ही ट्रंप ने रक्षा ठेकेदारों (Defense Contractors) को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां हथियार बनाने में देरी कर रही हैं लेकिन शेयर बायबैक और भारी डिविडेंड दे रही हैं, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
राष्ट्रपति ने इस फैसले के पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ते खतरों और “खतरनाक समय” का हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि सीनेटरों, सांसदों और सचिवों के साथ लंबी बातचीत के बाद उन्होंने तय किया है कि देश की सुरक्षा के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर का बजट पर्याप्त नहीं है, इसे बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर किया जाना जरूरी है।
विरोध की संभावना
जानकारों का मानना है कि इस प्रस्ताव को संसद (कांग्रेस) में कड़ी चुनौती मिल सकती है। डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन नेता भी बढ़ते राजकोषीय घाटे को देखते हुए इतने बड़े सैन्य खर्च का विरोध कर सकते हैं।
भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
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तकनीकी दौड़: अमेरिका इस बजट का बड़ा हिस्सा AI, स्पेस फोर्स और हाइपरसोनिक मिसाइलों पर खर्च करेगा। भारत को अपनी रक्षा तकनीक (जैसे ‘मेक इन इंडिया’) की गति को और तेज करना होगा ताकि वह इस वैश्विक दौड़ में पीछे न रहे।
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चीन का दबाव: अमेरिका का यह बजट मुख्य रूप से चीन को काउंटर करने के लिए है। चूंकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद है, इसलिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ी हुई सैन्य शक्ति अप्रत्यक्ष रूप से भारत के लिए एक रणनीतिक संतुलन (Strategic Balance) का काम कर सकती है।
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हथियारों की लागत: अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से उन्नत हथियारों की तकनीक महंगी हो सकती है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए रक्षा आयात के समीकरण बदल सकते हैं।
एक दिलचस्प तथ्य
अमेरिका का केवल यह प्रस्तावित बजट ($1.5 ट्रिलियन) दुनिया के अगले 15-20 देशों (चीन, रूस, भारत, यूके, फ्रांस आदि) के सम्मिलित रक्षा बजट से भी अधिक होगा।
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