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बागपत में तनाव: मंदिर-कब्रिस्तान की जमीन वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज, वाल्मीकि समाज ने दी पलायन की चेतावनी

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बागपत | बुधवार, 08 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र स्थित टांडा गांव में जमीन के मालिकाना हक को लेकर उपजा विवाद अब एक बड़े सामाजिक संकट में बदलता दिख रहा है। गांव के वाल्मीकि समाज ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन, जिस पर वर्षों से मंदिर और कब्रिस्तान बना हुआ है, उसे राजस्व रिकॉर्ड में चोरी-छिपे वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज कर दिया गया है। इस खुलासे के बाद से पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक और प्रशासनिक तनाव चरम पर है।

क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों के दावों के अनुसार, यह विवादित भूमि दशकों पहले ग्राम सभा द्वारा उनके पूर्वजों को वाल्मीकि कब्रिस्तान के लिए आवंटित की गई थी। समय के साथ, इस आस्था के केंद्र पर एक भव्य वाल्मीकि मंदिर का निर्माण भी किया गया, जहाँ ग्रामीण नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं।

विवाद तब शुरू हुआ जब हालिया राजस्व जांच और डिजिटल रिकॉर्ड्स के अपडेशन के दौरान यह पाया गया कि उक्त जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने मिलीभगत कर सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी कराई है ताकि जमीन पर अवैध कब्जा किया जा सके।

ग्रामीणों का आक्रोश और ‘पलायन’ का अल्टीमेटम

गांव के निवासी सुनील वाल्मीकि, सुरेश, मिंटू और धर्मेंद्र ने जिला प्रशासन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है:

“अगर एक महीने के भीतर राजस्व रिकॉर्ड में सुधार कर जमीन को वापस वाल्मीकि समाज के नाम नहीं किया गया, तो हम अपने घरों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगाकर गांव से सामूहिक पलायन करने को मजबूर होंगे।”

ताजा खबरों के लिए: matribhumisamachar.com/category/uttar-pradesh/

ग्राम प्रधान और प्रशासन का विरोधाभासी पक्ष

मामले में ग्राम प्रधान नवाजिश का कहना है कि खसरा आवंटन के पुराने सरकारी दस्तावेजों में यह जमीन पहले से ही वक्फ संपत्ति के रूप में अंकित है। हालांकि, वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि भौतिक रूप से वहां मंदिर काफी समय से स्थापित है।

वहीं, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कैलाश चंद तिवारी ने इस मामले में अनभिज्ञता जताते हुए कहा, “मामला संज्ञान में आया है। हम राजस्व विभाग के साथ मिलकर टीम गठित कर रहे हैं। मौके का मुआयना (Physical Verification) किया जाएगा और अभिलेखों की सत्यता जांची जाएगी ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।”

वर्तमान स्थिति: सुरक्षा और सतर्कता

मामले की गंभीरता को देखते हुए छपरौली थाना पुलिस गांव की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। प्रशासन कोशिश कर रहा है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक शांति बनी रहे।

विशेष बिंदु:

  • जांच का आधार: 1960-70 के दशक के पुराने राजस्व रिकॉर्ड्स की तलाश।

  • तनाव: वाल्मीकि समाज और वक्फ प्रबंधन के बीच बढ़ते मतभेद।

  • प्रशासनिक कदम: डीएम बागपत द्वारा मामले में विशेष टीम गठित करने की संभावना।

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