ढाका । सोमवार, 8 जून 2026
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने का एक और बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। इस बार उत्तर-पश्चिमी बांग्लादेश के गैबांधा जिले के हंसबारी गांव में स्थित ऐतिहासिक राधा-गोविंद मंदिर को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक प्रमुख माइनॉरिटी ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन (अल्पसंख्यक मानवाधिकार संगठन) ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि कुछ कट्टरपंथी तत्व इस ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण मंदिर पर हमला करने और इसे पूरी तरह जमींदोज करने की खुली धमकियां दे रहे हैं।
इन धमकियों के बाद से न केवल हंसबारी गांव, बल्कि आसपास के कई इलाकों में रहने वाले हिंदू परिवारों और स्थानीय लोगों के बीच गहरे डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
सोशल मीडिया पर नफरती वीडियो वायरल, भड़क सकता है सांप्रदायिक तनाव
धार्मिक भेदभाव और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाने वाले शीर्ष संगठन ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ (Bangladesh Hindu Buddhist Christian Unity Council) ने इस मामले पर गहरी आपत्ति जताई है। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि मंदिर को भारी नुकसान पहुंचाने और उसे गिराने से जुड़ा एक बेहद आपत्तिजनक व धमकी भरा वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रहा है।
परिषद ने चेतावनी दी है कि जानबूझकर फैलाई जा रही इस तरह की नफरती और उकसावे वाली हरकतों के पीछे एक सोची-समझी साजिश है। अगर इस पर तुरंत लगाम नहीं कसी गई, तो इलाके का सांप्रदायिक माहौल पूरी तरह बिगड़ सकता है, जिससे बरसों पुराने सामाजिक ताने-बाने और आपसी सद्भाव को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, सामाजिक सेवा का बड़ा केंद्र है यह मंदिर
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध समाज का कहना है कि यह राधा-गोविंद मंदिर केवल एक पारंपरिक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह इस पूरे क्षेत्र के लिए एक जीवनदायिनी सामाजिक संस्था की तरह काम करता है। इस विशाल मंदिर परिसर के भीतर कई जनकल्याणकारी परियोजनाएं पूरी तरह मुफ्त संचालित की जा रही हैं:
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आधुनिक वृद्धाश्रम: समाज के बेसहारा, बुजुर्ग और परित्यक्त वृद्धजनों को यहां सुरक्षित आश्रय, भोजन और सम्मानजनक जीवन दिया जाता है।
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मुफ्त चिकित्सा सेवा केंद्र: इस ग्रामीण इलाके के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अस्पताल मुफ्त दवाइयों और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच का सबसे बड़ा सहारा है।
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जनकल्याणकारी सुविधाएं: इसके अतिरिक्त बच्चों की शिक्षा, आपदा राहत और स्थानीय स्तर पर रोजगार से जुड़े कई सेवा कार्य इस परिसर से जुड़े हैं।
वर्तमान में स्थानीय लोगों और प्रबंधन के सहयोग से मंदिर के व्यापक विकास और रखरखाव का काम भी लंबे समय से चल रहा है। ऐसे में इस जनकल्याणकारी और ऐतिहासिक धरोहर को नष्ट करने की धमकी से आम जनता में भारी आक्रोश है।
HRCBM की रिपोर्ट में बड़ा और डरावना खुलासा: 4 महीने में 505 घटनाएं
यह धमकी भरा ताजा मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब पिछले महीने ही जारी एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार रिपोर्ट ने बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ‘ह्यूमन Rights कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज’ (HRCBM) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच महज 120 दिनों के भीतर बांग्लादेश के सभी 8 डिवीजनों (संभागों) के 62 जिलों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बर्बरता और उत्पीड़न की कुल 505 बड़ी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
HRCBM की रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे इन हमलों का पैटर्न बेहद खौफनाक है:
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जघन्य अपराध: लक्षित हत्याएं, संदिग्ध परिस्थितियां में मौतें, और सरेआम बेरहमी से मारपीट।
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धार्मिक और संपत्ति पर चोट: मंदिरों और धार्मिक मूर्तियों को तोड़ना, पवित्र स्थलों पर आगजनी, लूटपाट और अल्पसंख्यकों की कीमती जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करना।
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असुरक्षा: महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा, अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की धमकियां।
जांच और प्रशासन पर गंभीर सवाल:
‘HRCBM’ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि ये घटनाएं कोई छिटपुट मामले नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में योजनाबद्ध तरीके से अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ रहे एक खतरनाक ट्रेंड को दर्शाती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश मामलों में स्थानीय पुलिस और प्रशासन का रवैया बेहद सुस्त, पक्षपातपूर्ण और धीमा रहा है। जांच कमजोर होने के चलते आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।
सरकार और नागरिक समाज से तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश की अंतरिम/वर्तमान सरकार, स्थानीय पुलिस प्रशासन, प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं और नागरिक समाज (Civil Society) से बिना किसी देरी के त्वरित और सख्त कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।
संगठन का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की साइबर जांच कराकर डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर धमकी देने वाले उपद्रवियों और इसके पीछे छिपे मास्टरमाइंड्स की तुरंत पहचान की जाए। उन्हें गिरफ्तार कर उन पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और अल्पसंख्यकों के मन से डर का माहौल खत्म किया जा सके।
Matribhumisamachar


