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स्लीपर बसों में ‘जुगाड़’ पर गडकरी का कड़ा रुख: भ्रष्टाचार की होगी CBI जांच, नियम तोड़ने वालों को होगी जेल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. देश में स्लीपर बसों में बढ़ते हादसों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बस निर्माण में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मामलों की सीबीआई (CBI) जांच कराई जाएगी।

अवैध निर्माण और ‘जुगाड़’ पर सर्जिकल स्ट्राइक

नितिन गडकरी ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर उन अधिकारियों और बस बॉडी बिल्डरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर “जुगाड़” और “अवैध मॉडिफिकेशन” के जरिए बसें तैयार कर रहे हैं। मंत्री ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों और भ्रष्ट अधिकारियों को अब सीधे जेल भेजा जाएगा।

जैसलमेर हादसा और बढ़ते अग्निकांड बने वजह

यह कड़ा कदम पिछले छह महीनों में हुई भयावह घटनाओं के बाद उठाया गया है। आंकड़ों के अनुसार:

  • पिछले 6 महीनों में स्लीपर बसों में 6 बड़े अग्निकांड हुए हैं।

  • जैसलमेर जैसे बड़े हादसों को मिलाकर अब तक 145 मासूम लोगों की जान जा चुकी है।

  • जांच में पाया गया कि अधिकांश बसें घटिया निर्माण सामग्री और गलत डिजाइन के कारण ‘चलता-फिरता ताबूत’ साबित हो रही थीं।

‘बस बॉडी कोड 2026’ (Bus Body Code 2026) लागू

भविष्य में हादसों को रोकने के लिए सरकार ने निर्माण की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया है:

  • अब कोई भी स्थानीय वर्कशॉप स्लीपर कोच का निर्माण नहीं कर पाएगी।

  • केवल प्रमाणित ऑटोमोबाइल कंपनियां या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इकाइयां ही स्लीपर बसों के निर्माण के लिए अधिकृत होंगी।

अनिवार्य सुरक्षा उपकरण: अब हर बस में होंगे ये सिस्टम

सड़क परिवहन मंत्रालय ने मौजूदा बसों के लिए नए सुरक्षा उपकरण अनिवार्य कर दिए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • फायर डिटेक्शन सिस्टम: आग लगने की तुरंत सूचना देने वाला तंत्र।

  • इमरजेंसी एग्जिट: हथौड़े के साथ सुरक्षित निकास द्वार।

  • इमरजेंसी लाइटिंग: अंधेरे या धुएं में रास्ता दिखाने वाली रोशनी।

  • ड्राइवर ड्राउजीनेस इंडिकेटर: यदि ड्राइवर को नींद आती है, तो यह सिस्टम उसे अलर्ट कर देगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।