नई दिल्ली । मंगलवार, 9 जून 2026
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में बुनियादी अधिकारों और आर्थिक बदहाली को लेकर चल रहा जन-आक्रोश अब बेहद हिंसक मोड़ ले चुका है। भारत सरकार ने मंगलवार को इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान प्रशासन की बर्बरता की कड़े शब्दों में आलोचना की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान वहां के स्थानीय नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर चुका है।
मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान भटकाने की हताश कोशिश
साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के एक नए प्रोपेगैंडा पैटर्न का भंडाफोड़ किया। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से लगातार झूठी खबरें, भ्रामक जानकारियां और एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
“हम पिछले कुछ समय से पाकिस्तान से आने वाली फर्जी खबरों और वीडियो का एक खास पैटर्न देख रहे हैं। यह पाकिस्तान द्वारा अपनी आंतरिक आर्थिक और राजनीतिक विफलताओं को छिपाने और कब्जे वाले क्षेत्र (PoK) में हो रहे गंभीर मानवाधिकारों के हनन से दुनिया का ध्यान भटकाने का एक हताश प्रयास है।”
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय (International Community) से पुरजोर अपील की है कि वे इस्लामाबाद के इन कुकर्मों को नजरअंदाज न करें और निर्दोष नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों के लिए पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर जवाबदेह ठहराएं।
रावलकोट में भड़की भीषण हिंसा: सोशल मीडिया दावों ने बढ़ाई चिंता
PoK में जमीनी हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले लोग भारी बिजली बिलों, आटे-दाल जैसी बुनियादी चीजों की कमी और संसाधनों की लूट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने सीधे गोलियों और लाठियों का सहारा लिया है।
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आधिकारिक आंकड़े: मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी स्रोतों के अनुसार, हाल ही में रविवार रात रावलकोट में हुई हिंसक झड़पों और जवाबी फायरिंग में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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वास्तविक स्थिति का दावा: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर कई स्थानीय पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया है कि मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक है। उनके अनुसार, दर्जनों प्रदर्शनकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
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कम्युनिकेशन ब्लैकआउट: पाकिस्तानी प्रशासन ने क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को आंशिक रूप से सस्पेंड कर दिया है, ताकि जमीनी हकीकत और पुलिस की बर्बरता के वीडियो बाहर न आ सकें।
भारत का स्थायी और कड़ा रुख
भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर यह साफ कर दिया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। भारत वहां के नागरिकों की सुरक्षा और उनके बुनियादी मानवाधिकारों के लिए हमेशा आवाज उठाता रहेगा।
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